Rapid Rail Project: उत्तर प्रदेश की दो प्रमुख औद्योगिक और शैक्षणिक नगरी लखनऊ और कानपुर के बीच अब सफर और भी तेज़, आसान और सुविधाजनक होने जा रहा है. नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) की लखनऊ-कानपुर रैपिड रेल परियोजना को लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) से मंजूरी मिल चुकी है, जिससे इस मेगाप्रोजेक्ट को तेजी मिलने की उम्मीद है.
160 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ेगी रैपिड रेल
परियोजना के तहत बनने वाली रैपिड रेल 160 किमी प्रति घंटे की स्पीड से चलेगी. जिससे लखनऊ से कानपुर का सफर महज 40 से 50 मिनट में पूरा किया जा सकेगा. वर्तमान में इस रूट पर सड़क मार्ग से यात्रा करने पर 1.5 से 2 घंटे लगते हैं. रैपिड रेल इस समय को लगभग आधा कर देगी.
NCRTC को LDA से मिला अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC)
LDA और NCRTC के बीच हाल ही में हुई बैठक में यह तय हुआ कि परियोजना का निर्माण लखनऊ की महायोजना 2041 के अनुरूप किया जाएगा. इसी के तहत एलडीए ने परियोजना को NOC जारी कर दिया है. NCRTC ने पहले ही लखनऊ में सर्वे और प्रक्रिया संबंधी दौरे पूरे कर लिए हैं.
अमौसी एयरपोर्ट से गंगा बैराज तक होगा सफर
इस रैपिड रेल का रूट अमौसी एयरपोर्ट (लखनऊ) से शुरू होकर बनी, उन्नाव, जैतीपुर, अजगैन, मगरवारा होते हुए कानपुर के गंगा बैराज तक जाएगा. यह रूट रेल, सड़क और मेट्रो स्टेशनों से जुड़ेगा. जिससे यात्रियों को मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी मिलेगी.
ट्रैफिक जाम और प्रदूषण से राहत
रैपिड रेल के संचालन से न केवल समय की बचत होगी बल्कि ट्रैफिक जाम और प्रदूषण की समस्या से भी राहत मिलेगी. सड़क यातायात का दबाव कम होने से पर्यावरण पर सकारात्मक असर पड़ेगा.
लखनऊ और कानपुर मेट्रो स्टेशनों से जुड़ेगी रैपिड रेल
रैपिड रेल को लखनऊ और कानपुर की मेट्रो सेवाओं से जोड़ने की योजना है ताकि लोग एक प्लेटफॉर्म से दूसरे तक निर्बाध यात्रा कर सकें. यह कनेक्टिविटी यात्रियों को स्मार्ट ट्रैवल अनुभव देगी.
मॉडर्न तकनीक से लैस होगी यह ट्रेन
लखनऊ-कानपुर रैपिड रेल में मेरठ-दिल्ली रैपिड रेल मॉडल जैसी स्मार्ट और आधुनिक सुविधाएं होंगी, जैसे:
- हाई-स्पीड ट्रैक
- तेज ब्रेकिंग सिस्टम
- ऑटोमैटिक डोर
- स्मार्ट टिकटिंग
- एयर-कंडीशन्ड कोचेस
इससे यह ट्रेन न सिर्फ आरामदायक बल्कि हर मौसम में चलने योग्य होगी.
प्रोजेक्ट की शुरुआत और विकास यात्रा
इस परियोजना का प्रस्ताव सबसे पहले 2015 में तैयार किया गया था.
- 2021 में तत्कालीन प्रमुख सचिव दीपक कुमार ने RFP तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की.
- 2022 में शासन स्तर पर बैठक हुई और परियोजना को गति मिली.
अब 2025 में LDA से मंजूरी मिलने के बाद इसके भौतिक कार्य जल्द शुरू होने की संभावना है.
कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय विकास में होगा बड़ा योगदान
यह रैपिड रेल प्रोजेक्ट सिर्फ यात्रा सुविधा तक सीमित नहीं रहेगा. बल्कि इसके जरिये लखनऊ और कानपुर के बीच आर्थिक, सामाजिक और औद्योगिक विकास को भी नई रफ्तार मिलेगी. यह परियोजना उत्तर प्रदेश की रीजनल कनेक्टिविटी का नया मॉडल बनेगी.
कितने लोग करते हैं रोजाना सफर?
लखनऊ और कानपुर के बीच रोजाना हजारों लोग यात्रा करते हैं – छात्र, कर्मचारी, व्यापारी और पर्यटक. फिलहाल उन्हें जाम, देरी और असुविधा का सामना करना पड़ता है. रैपिड रेल उनके लिए एक तेज, सुरक्षित और भरोसेमंद विकल्प साबित होगी.
पर्यावरण और ऊर्जा की दृष्टि से भी लाभदायक
रैपिड रेल इलेक्ट्रिक ऊर्जा पर आधारित होगी. जिससे डीजल/पेट्रोल आधारित वाहनों की निर्भरता घटेगी. इससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और पर्यावरण संतुलन को बढ़ावा मिलेगा.
लैटेस्ट रैपिड रेल टेक्नोलॉजी का नमूना
NCRTC की यह परियोजना हाई-टेक रैपिड ट्रांजिट सिस्टम का उदाहरण होगी. इसमें शामिल हैं:
- AI-समर्थित संचालन प्रणाली
- सेंट्रल ट्रैफिक कंट्रोल सेंटर
- इंटरचेंज स्टेशन और डिजिटल गाइडेंस सिस्टम
कब तक शुरू होगा संचालन?
हालांकि संचालन की सटीक तिथि अभी तय नहीं हुई है. लेकिन LDA से अनुमति मिलने के बाद अब निर्माण कार्य तेजी से शुरू होगा. अनुमान है कि 3 से 4 वर्षों में रैपिड रेल सेवा शुरू की जा सकती है.
लखनऊ-कानपुर रैपिड रेल से जुड़े संभावित लाभ
- 40-50 मिनट में यात्रा पूरी
- स्मार्ट कनेक्टिविटी
- जाम और प्रदूषण से राहत
- पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा
- सामाजिक और आर्थिक विकास में तेजी
यदि आप चाहें तो मैं इस लेख का सोशल मीडिया पोस्ट, ट्रैवल गाइड संस्करण या NCRTC विजन डॉक्युमेंट शैली प्रस्तुति भी तैयार कर सकता हूं.