Indian Currency : भारतीय करेंसी का नोट्स के पीछे कई फैक्टस हैं। भारतीय नोटों पर महात्मा गांधी की तस्वीर ही नजर आती है, लेकिन कभी आपने यह सोचा है कि नोटों पर राष्ट्रपिता से पहले किसकी तस्वीर छपती थी और क्यों उनकी तस्वीर हटाकर राष्ट्रपिता की फोटा (photo of father of nation) छापी गई थी। आइए खबर में विस्तार से जानते हैं इस बारे में-
आपको पता ही होगा कि भारतीय नोट पर महात्मा गांधी की तस्वीर ही नजर आती है, लेकिन क्या आपके मन में यह सवाल आया है कि क्या गांधी जी की तस्वीर शुरू से ही भारतीय नोटों पर थी। ये जानना काफी दिलचस्प होगा कि आखिर महात्मा गांधी से पहले किसकी तस्वीर भारतीय नोटों (Mahatma Gandhi image ) पर छापी जाती थी और किन कारणों से उनकी तस्वी नोट पर से हटाई गई।
पहले नोटों पर थी किंग जॉर्ज पंचम की तस्वीर
सबसे पहले तो आप यह जान लें कि औपनिवेशिक दौर में भारत में कागजी मुद्रा (Paper currency in India) की शुरुआत की गई और उस समय नोट सिर्फ लेन-देन ही नहीं, बल्कि सत्ता का प्रतीक भी था। इस वजह से ब्रिटिश शासन के दौरान भारतीय नोटों पर अंग्रेज शासकों की फोटो नजर आती थी।
जानकारी के लिए बता दें कि ब्रिटिश राज में जो पहला भारतीय नोट जारी किया गया था, उसमे सबसे पहले किंग जॉर्ज (RBI replaced king george ) पंचम की तस्वीर छपी हुई थी। उनके बाद किंग जॉर्ज षष्ठम के चित्र वाले नोट भारतीय नोट पर छापे गए। ब्रिटेन में इन नोटों की छपाई होती थी और इन्हें भारत में चलन के लिए ट्रांस्फर किया जाता था। इन नोटों पर अंग्रेजी राजशाही की स्पष्टता क्लियर नजर आती थी
राष्ट्र की भावना से जुड़ा है भारतीय रुपया
बता दें कि 1947 में जब भारत आजाद हुआ था तो उसके बाद सरकार के सामने कई सवाल खड़े थे कि क्या नए भारत की करेंसी पर भी किसी की तस्वीर होनी चाहिए या नहीं, उसी समय यह हुआ था कि नोटों पर किसी व्यक्ति की तस्वीर नहीं छपेगी। यह फैसला इस वजह से लिया गया ताकि नई भारतीय पहचान एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की भावना से जुड़े। इस कारणवश आरबीआई की ओर से नोटों पर अशोक स्तंभ के सिंह चिह्न को प्राथमिकत दी गई। ऐसे में खेती, उद्योग, विज्ञान और विकास से जुड़े पिक्चर को भारतीय नोटों की पहचान बनाया गया।
पहली बार कब छपी महात्मा गांधी की फोटो
जानकारी के लिए बता दें कि पहली बार 1969 में महात्मा गांधी की तस्वीर नोटों पर छपी थी, क्योंकि उस समय जारी किए गए स्मारक नोट पर गांधी जी बैठे नजर आते हैं और पीछे सेवाग्राम आश्रम की झलक दिखती है। हालांकि यह नोट सीमित उद्देश्य के लिए था और इसे नियमित करेंसी नहीं माना गया।
क्यों छापी गई महात्मा गांधी की तस्वीर
1987 में जब 500 रुपये का नोट दोबारा जारी किया गया, तब उस पर महात्मा गांधी की तस्वीर लगाई गई, लेकिन असली बदलाव 1996 में आया, जब RBI ने महात्मा गांधी सीरीज शुरू की। उसके बात से ही भारत में जो नोट जारी हुए हैं, उन पर भी गांधी जी का चेहरा अनिवार्य रूप से छापा जाने लगा। इस निर्णय के पीछे तर्क क्लियर था कि महात्मा गांधी आजादी की लड़ाई के प्रतीक के साथ ही पूरी दुनिया में शांति के प्रतिनिधि माने जाते थे।
RBI ने बताई यह बात
RBI के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महात्मा गांधी का चेहरा जाना जाता है और भारत के राष्ट्रपिता की तस्वीर राजनीतिक विवादों से ऊपर मानते हैं। इस वजह से उनकी फोटो को भारतीय करेंसी की स्थायी पहचान बनाया गया। सुरक्षा के तौर पर एक ही चेहरे को सभी नोटों पर रखने से डिजाइन और पहचान में एकरूपता बनी रही है।
