तिल की खेती कर करें बंपर कमाई ,जानिए तिल का खेती करने का तरीका

 
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देश में अभी भी खरीफ सीजन की फसलों की बुवाई का समय चल रहा है आज हम आपको तिल की ऐसी किस्म के बारे में बताएंगे जिनमें लागत कम आती है और उत्पादन ज्यादा होता है 

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इंडिया में तिल की उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए विभिन्न कृषि  विश्वविद्यालयों की तरफ से बड़े पैमाने पर काम किया जा रहा है इसके तहत कई प्रकार की नई किस्मों को और नई टेक्निक का विकास किया जा रहा है अभी हाल ही में झारखंड के बिरसा कृषि  विश्वविद्यालयों  द्वारा कांके सफेद नाम की एक किस्म विकसित की गई है जिसकी खेती किसान गरमा और खरीफ दोनों सीजन में कर सकते है इसके संबंध में तिलहन फसल विशेषज्ञ डॉ सोहन राम ने बताया की कांके सफेद किस्म अन्य दूसरी किस्मों से ज्यादा उत्पादन दे सकती है 
तिल की कांके सफेद नामक तैयार की गई किस्म 75 से 80 दिनों में पकाकर तैयार हो जाती है इसकी उत्पादन क्षमता 4 से 7 क्विंटल प्रति हेक्टेयर बताई गयी है इस किस्म में तेल की मात्रा 42 से 45 % तक होती है यह कम पानी में आसानी से जीवित रह सकता है 

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सबसे पहले तिल की बुवाई बारिश शुरू होने के बाद जून मध्य से जुलाई महीने के अंत तक की जाती है तिल की बुवाई करते समय यह ध्यान रखना चाहिए की एक हेक्टेयर में बुवाई के लिए 5 से 6 किलोग्राम बीज की जरूरत होती है बुवाई करते समय एक लाइन से दूसरी लाइन के बीच दुरी 30 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे के बीच की दुरी 10 सेंटीमीटर होनी चाहिए बुवाई होने के बाद हल्की सिंचाई कर देनी चाहिए ताकि नमी बनी रहे बुवाई के समय 52 किलो यूरिया 88 किलो ग्राम DAP 35 किलो ग्राम म्युरिएट पोटाश प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करना चाहिए 
बुवाई को 15 दिन बाद निराई का काम शुरू कर देना चाहिए