Salary Hike – मौजूदा समय में केंद्रीय कर्मचारियों के लिए यह सवाल सबसे अहम बन गया है कि क्या बजट 2026 के बाद उनकी सैलरी बढ़ेगी। लंबे इंतजार और आठवें वेतन आयोग की देरी के बीच कर्मचारियों को सैलरी बढ़ोतरी की दिशा में नया अपडेट मिल गया है… तो ऐसे में चलिए आइए नीचे खबर में जानते हैं, कि आखिर इस बार की स्थिति और संभावनाएं क्या हैं-
केंद्रीय कर्मचारियों को 8वें वेतन आयोग से होने वाली सैलरी बढ़ोतरी का इंतजार अभी और खिंचता नजर आ रहा है। जनवरी 2026 खत्म होने के बाद भी वेतन संशोधन (pay revision) को लेकर कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है, जिससे साफ संकेत मिलते हैं कि आयोग का लागू होना तय समय पर मुश्किल है।
रेटिंग एजेंसी ICRA की रिपोर्ट के अनुसार, इस देरी का असर कर्मचारियों के साथ-साथ आने वाले सालों में सरकार की वित्तीय स्थिति पर भी पड़ सकता है।
क्यों टल रहा आठवां वेतन आयोग-
आमतौर पर हर 10 साल में नया वेतन आयोग लागू किया जाता है। सातवां वेतन आयोग (7th pay commission) 1 जनवरी 2016 से लागू हुआ था, इसलिए माना जा रहा था कि आठवां वेतन आयोग जनवरी 2026 से प्रभावी हो जाएगा। लेकिन ICRA की रिपोर्ट के मुताबिक, आयोग की रिपोर्ट तैयार होने में अभी 15 से 18 महीने तक का वक्त लग सकता है। ऐसे में निकट भविष्य में सैलरी रिवीजन (salary revision) की उम्मीद फिलहाल काफी कम दिखाई दे रही है।
एरियर से सरकार के खर्च पर बढ़ेगा दबाव-
ICRA के मुताबिक, जब भी आठवां वेतन आयोग लागू किया जाएगा, सरकार इसे 1 जनवरी 2026 से रेट्रोस्पेक्टिव यानी पिछली तारीख से लागू कर सकती है। ऐसे में कर्मचारियों को एकमुश्त 15 महीने या उससे अधिक का एरियर (arrear) मिलने की संभावना बनेगी। इसका सीधा असर सरकारी खजाने पर पड़ेगा और एक ही वित्त वर्ष में खर्च में तेज बढ़ोतरी हो सकती है। अनुमान है कि FY2028 में वेतन संबंधी खर्च 40 से 50 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।
क्या कहते हैं पुराने अनुभव-
पिछले वेतन आयोगों का अनुभव भी सरकार की चिंता बढ़ा रहा है। सातवें वेतन आयोग (7th pay commission) के समय भले ही सिर्फ 6 महीने का एरियर दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद एक ही साल में वेतन खर्च 20 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ गया था। वहीं, 6वें वेतन आयोग में देरी के चलते ढाई साल से अधिक का एरियर देना पड़ा, जिससे कई वर्षों तक बजट पर दबाव बना रहा। इसी कारण 8वें वेतन आयोग को अब एक बड़े वित्तीय जोखिम के तौर पर देखा जा रहा है।
बजट 2026 में बदल सकती है पूंजीगत खर्च की रणनीति-
ICRA का अनुमान है कि वेतन आयोग से जुड़ने वाले बड़े खर्च के असर को संतुलित करने के लिए सरकार FY2027 में ही पूंजीगत खर्च बढ़ा सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, कैपेक्स करीब 14 प्रतिशत बढ़कर 13.1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। इससे इंफ्रास्ट्रक्चर (infrastructure) और विकास परियोजनाओं (development projects) को रफ्तार मिलेगी और आगे चलकर वेतन व पेंशन के बढ़ते बोझ से निपटने के लिए कुछ वित्तीय गुंजाइश भी बनी रहेगी।
कर्मचारियों पर क्या पड़ेगा असर-
केंद्रीय कर्मचारियों के लिए यह देरी निश्चित रूप से निराशाजनक है, लेकिन उम्मीद अभी खत्म नहीं हुई है। सैलरी बढ़ोतरी टली हुई है, रद्द नहीं। आयोग लागू होने पर कर्मचारियों को बड़ा एरियर मिलने की संभावना (Employees are likely to get huge arrears) बनी रहेगी। हालांकि, लंबे इंतजार ने अनिश्चितता बढ़ा दी है और सरकार के लिए बजट (budget) योजना और भी चुनौतीपूर्ण हो गई है। अब स्पष्ट है कि आठवां वेतन आयोग सिर्फ वेतन बढ़ोतरी का मामला नहीं, बल्कि आने वाले कई वित्तीय बजटों (financial budgets) की दिशा तय करने वाला एक अहम मुद्दा बन गया है।
