किसान साथियो सरसों में जितना महत्वपूर्ण पहली सिंचाई का होता है इतना किसी अन्य का नहीं। इसलिए पहली सिंचाई के समय सबसे ज़्यादा ध्यान देने की जरूरत है। सिंचाई का समय मिट्टी, तापमान, जलवायु आदि के हिसाब से अलग अलग हो सकता है। अक्सर हमारे किसान सिंचाई की टाइमिंग और पहली सिंचाई के बाद दी जाने वाली खाद के चयन में गलतियां कर देते हैं जिसका आगे चलकर परिणाम अच्छा नहीं निकलता | दोस्तों तो सरसों की पहली सिंचाई किस समय करनी चाहिए, कौन से खाद का उपयोग करना चाहिए, और अच्छी फसल उत्पादन के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। यदि आप सरसों की बिजाई कर रहे हैं, तो इस समय की गई कोई भी छोटी लापरवाही आपके उत्पादन को प्रभावित कर सकती है।
पहली सिंचाई का सही समय
सरसों की पहली सिंचाई का सही समय 25 से 35 दिन के बीच होता है। यह समय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यदि आप सही समय पर सिंचाई करते हैं, तो पौधों का तना मजबूत और मोटा हो जाएगा। इस मोटे तने के कारण पौधों की शाखाएं भी मजबूत बनेंगी, जो आगे चलकर फलियों में परिवर्तित होंगी।
यदि आपके खेत की मिट्टी रेतीली है, तो नमी अधिक देर तक नहीं टिकेगी। जल्दी सूख जाती है ऐसे में, पहली सिंचाई समय से करनी पड़ेगी। इसके अलावा, यदि बुवाई के समय मिट्टी में नमी कम थी या किसान ने बारिश की नमी का संरक्षित नहीं किया है, तो पौधे मुरझा सकते हैं तो पौधों में मुरझाने या घबड़ाने की समस्या बढ़ जाती है। पौधों का रंग भी हरा होने के बजाय नीला दिखाई देने लगेगा, और उनका तना फूलने की बजाए वो पतला होता जाएगा।
इसलिए, यदि आपके पौधे 15 से 25 दिन के हो चुके हैं और वे मुरझाने लगे हैं, तो आपको बिना देरी किए सिंचाई करनी चाहिए। अगर सरसों के पौधे 27 से 28 दिन पुराने हैं और उनकी स्थिति ठीक है, तो सिंचाई का सही समय हो गया है। वहीं, यदि बुवाई के समय मिट्टी में अधिक नमी थी, तो पौधों की जड़ें कमजोर हो सकती हैं और धीरे-धीरे नीली पड़ सकती हैं। ऐसे में सिंचाई करना न केवल पौधों के लिए आवश्यक है, बल्कि यह उनकी वृद्धि को प्रोत्साहित भी करता है
पौधों का संख्या
जब सरसों की पहली सिंचाई करनी होती है, तो सबसे पहले यह देखना ज़रूरी है कि पौधे कितने घने हैं। यदि बुवाई के समय सीड रेट अधिक रखा गया था या पौधे अधिक पास-पास लगाए गए थे, तो पौधों की बढ़त में कई समस्याएं आ सकती हैं। घने पौधों में रोशनी और हवा का प्रवाह कम होने के कारण उनकी शाखाएं ठीक से नहीं बनतीं और उत्पादन में कमी आ सकती है।
बहुत अधिक घनत्व वाले पौधों में वाइट रस्ट जैसी बीमारियां लगने की संभावना बढ़ जाती है। यह एक फंगस रोग है जो पौधों के तने को प्रभावित करता है और उन पर पाउडर जैसा सफेद परत बना देता है। इसके साथ ही, सघन पौधों में ओस और कोहरे के कारण नमी अधिक समय तक ठहरती है, जिससे पौधे गलने का खतरा बढ़ जाता है। पहली सिंचाई से पहले यह ज़रूरी है कि अधिक घने पौधों को हटाया जाए। हालांकि, स्वस्थ दिखने वाले पौधों को उखाड़ना कठिन हो सकता है, लेकिन लंबी अवधि में इसका लाभ मिलता है। पौधों के बीच लगभग 1 फीट की दूरी रखने से उनकी ब्रांचिंग बेहतर होती है, जिससे अधिक फली और उच्च गुणवत्ता का उत्पादन संभव हो पाता है।
मिट्टी की परिस्थिति
अगर आपके खेत की मिट्टी रेतीली है, तो उसमें नमी लंबे समय तक टिक नहीं पाती। ऐसे में, अगर सरसों की बिजाई के समय खेत में बरसात की हल्की नमी थी और आप सिंचाई नहीं कर पाए थे, तो आपको अब ध्यान देना चाहिए। जब सरसों के पौधे मुरझाने लगते हैं, उनका रंग हरे से नीला होने लगता है, और तना पतला होकर ऊपर की ओर बढ़ता दिखता है, तब यह संकेत होता है कि फसल को तुरंत सिंचाई की जरूरत है। ऐसी स्थिति में, फसल की उम्र चाहे 15, 20 या 25 दिन की हो, तुरंत सिंचाई कर दें।
अगर बिजाई के समय खेत में नमी अधिक थी और जल्दबाजी में बुवाई कर दी गई, तो पौधों के बढ़ते समय नमी तेजी से खत्म हो जाती है। ऐसे खेतों में तने पतले हो सकते हैं और पौधों का रंग नीला पड़ने लगता है। यह भी बताता है कि पौधों को अतिरिक्त नमी की जरूरत है। इन खेतों में जल्दी सिंचाई करके पौधों को पोषण प्रदान करना महत्वपूर्ण होता है ताकि उनकी ग्रोथ ठीक रहे।
आदर्श सिंचाई समय
सामान्यतः सरसों की फसल के लिए 25 से 35 दिन का समय सिंचाई के लिए उपयुक्त माना जाता है। लेकिन अगर मिट्टी में नमी की कमी हो या पहले की स्थिति सही न हो, तो अपनी फसल की स्थिति के अनुसार सिंचाई का समय तय करें।
सिंचाई के दौरान खाद का उपयोग
जब आप पहली सिंचाई करते हैं, तो आपको खाद देने के समय दो प्रमुख बातें ध्यान में रखनी होती हैं। सबसे पहले, यदि आपने सरसों की बिजाई करते वक्त डीएपी, सिंगल सुपर फास्फेट, सल्फर जैसे खाद नहीं दिए थे या कम दिए थे, तो अब आपको सिंचाई के साथ इन खादों को देने का सही समय है। इन खादों को देने से, जब पानी खेत में जाता है, तो ये खाद सीधे पौधों की जड़ों के पास पहुँच जाते हैं, जिससे पोषक तत्वों का अवशोषण बढ़ता है और फसल को पूरी तरह से लाभ होता है।
पहली सिंचाई के बाद, आप देखेंगे कि पौधों के आसपास सफेद जड़ें उभर रही होती हैं। ये नई जड़ें पौधे के चारों ओर फैल जाती हैं, जो उनकी वृद्धि को प्रोत्साहित करती हैं। इस समय पर यदि आप डीएपी, सिंगल सुपर फास्फेट, और सल्फर जैसे खादों का उपयोग करते हैं, तो इनका 100% परिणाम मिलता है, क्योंकि यह खाद जड़ों के पास पहुंचकर पौधों की वृद्धि को उत्तेजित करता है।
यूरिया और जिंक का उपयोग
अगर आपने बिजाई के समय डीएपी, सिंगल सुपर फास्फेट, पोटाश और सल्फर जैसे खाद दिए थे, तो इस समय आपको केवल यूरिया और जिंक का उपयोग करना है। यूरिया की मात्रा लगभग 50 किलो प्रति एकड़ होनी चाहिए, और जिंक की मात्रा 10 से 15 किलो प्रति एकड़ रख सकते हैं। जिंक को सिंचाई से पहले खाद के साथ मिलाकर छिड़कने से अच्छे परिणाम मिलते हैं। सिंचाई के बाद यूरिया डालने से नाइट्रोजन का सही तरीके से अवशोषण होता है, और पौधों को भरपूर पोषण मिलता है।
एनपीके स्प्रे का महत्व
सिंचाई के बाद 2-4 दिन में, आपको NPK 19:19:19 या 20:20:20 का स्प्रे करना चाहिए। यह स्प्रे पौधों की फोलियरी नुट्रिशन को बढ़ाता है और उनकी वृद्धि को तेज करता है। सरसों के पौधे का आकार चौड़ा होने के कारण, यह स्प्रे आसानी से पौधों द्वारा ग्रहण किया जाता है, और इसके परिणाम शानदार होते हैं। इसके अलावा, यदि आप माइक्रो न्यूट्रिएंट भी मिलाना चाहते हैं, तो आप इसे भी स्प्रे में डाल सकते हैं, जिससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में और अधिक सुधार होगा।
नोट: रिपोर्ट में दी गई जानकारी किसानों के निजी अनुभव और इंटरनेट पर उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से एकत्रित की गई है। किसान भाई किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृषि विशेषज्ञों की सलाह अवश्य लें।