Smart Meter Installation: प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं के परिसर में स्मार्ट मीटर लगाने का काम अब तेज़ गति से किया जा रहा है. वर्ष 2025 तक सभी बिजली कनेक्शनों पर स्मार्ट बिजली मीटर लगाए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. इसके तहत महानगरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी कार्य ज़ोरों पर चल रहा है.
अब तक एक लाख से अधिक मीटर लगाए जा चुके
बिजली विभाग के आंकड़ों के अनुसार अब तक जिले में कुल 1,07,646 उपभोक्ताओं के परिसरों में स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं. इसके अलावा 5572 मीटर उद्योगों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, ट्रांसफार्मरों और फीडरों पर भी लगाए जा चुके हैं. यह आंकड़ा बिजली व्यवस्था में पारदर्शिता और दक्षता लाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है.
स्मार्ट मीटर लगाने में ग्रामीण क्षेत्र भी कर रहे नेतृत्व
स्मार्ट मीटर स्थापना अभियान में महानगर पहले स्थान पर है. लेकिन ग्रामीण सर्किल भी तेजी से दूसरे स्थान पर पहुंच रहा है. खास बात यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्ता भी अब इस तकनीकी बदलाव को स्वीकृति दे रहे हैं और सक्रिय रूप से इसमें सहयोग कर रहे हैं.
जीनस कंपनी की देखरेख में हो रहा कार्य
स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य जीनस कंपनी द्वारा किया जा रहा है. कंपनी के मैनेजर राकेश सिंह ने बताया कि “ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्ताओं में स्मार्ट मीटर को लेकर सकारात्मक सोच देखी जा रही है. महानगरों में भी अभियंताओं के सहयोग से तेजी से कार्य हो रहा है.”
उपभोक्ताओं की आशंका दूर करने के लिए दो मीटर लग रहे
कुछ उपभोक्ताओं द्वारा यह सवाल उठाया गया कि स्मार्ट मीटर तेज़ चलते हैं. जिससे बिजली बिल अधिक आ सकता है. ऐसे मामलों में बिजली विभाग स्मार्ट मीटर के साथ पुराने मीटर को भी परिसर में अस्थायी रूप से जोड़ रहा है.
15 दिनों तक दोनों मीटर की रीडिंग ली जा रही है. ताकि उपभोक्ता खुद देख सकें कि दोनों रीडिंग में कोई फर्क नहीं है. अब तक सभी जगहों पर दोनों मीटरों की रीडिंग समान पाई गई है. जिससे उपभोक्ताओं में विश्वास बढ़ा है.
पुराने मीटर 15 दिन बाद हटाए जा रहे
बिजली निगम के सहयोग से पुराने मीटरों को 15 दिन बाद हटाया जा रहा है. इस दौरान स्मार्ट मीटर की रीडिंग का मिलान पुराने मीटर से किया जाता है. इस प्रक्रिया से उपभोक्ताओं की संतुष्टि और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा रही है.
महानगरों में 56 हजार से ज्यादा परिसर पहले से कवर
महानगर क्षेत्र में अब तक 56,000 से अधिक उपभोक्ताओं के परिसरों में स्मार्ट मीटर पहले ही लगाए जा चुके हैं. नए स्मार्ट मीटरों के साथ अगर पुराने मीटरों को भी जोड़ दिया जाए तो केवल महानगर क्षेत्र में ही एक लाख से अधिक परिसर स्मार्ट मीटर से कवर हो चुके हैं.
स्मार्ट मीटर से उपभोक्ताओं को होंगे कई फायदे
- रीयल टाइम रीडिंग से बिजली की खपत पर नियंत्रण
- बिलिंग में पारदर्शिता, उपभोक्ता खुद देख सकेगा मीटर रीडिंग
- ऑनलाइन ट्रैकिंग और अलर्ट सिस्टम, ज्यादा खपत होने पर नोटिफिकेशन
- प्रीपेड विकल्प, जिससे बिलिंग नियंत्रण में रहे
- तेज कनेक्शन/डिसकनेक्शन प्रणाली, किसी गड़बड़ी पर तुरंत कार्रवाई
डिजिटल बदलाव की ओर एक बड़ा कदम
बिजली विभाग का यह स्मार्ट मीटर अभियान डिजिटल भारत की दिशा में एक सशक्त पहल मानी जा रही है. इससे न केवल बिजली चोरी पर लगाम लगेगी, बल्कि उपभोक्ताओं को सही रीडिंग और उचित बिल मिलेगा. विभाग का लक्ष्य है कि वर्ष 2025 तक सभी कनेक्शनों पर स्मार्ट मीटर लग जाएं.
उपभोक्ताओं से सहयोग की अपील
बिजली विभाग और जीनस कंपनी की ओर से उपभोक्ताओं से अनुरोध किया गया है कि वे स्मार्ट मीटर लगाए जाने के कार्य में सहयोग करें और अगर कोई आशंका हो तो निर्दिष्ट नंबरों पर शिकायत दर्ज कराएं. उपभोक्ताओं की संतुष्टि के लिए विभाग हर स्तर पर पारदर्शी प्रक्रिया अपना रहा है.
