Toll plaza: अगर आप अक्सर एक्सप्रेसवे या नेशनल हाईवे पर सफर करते हैं, तो यह खबर आपके लिए राहत लेकर आई है। सरकार की नई टोल नीति के तहत अब अधूरी या निर्माणाधीन सड़कों पर पूरा टोल नहीं देना होगा। सड़क की गुणवत्ता और सुविधा के हिसाब से टोल तय होगा, जिससे कई रूट्स पर टोल टैक्स 50% तक घट गया है-
अगर आप अक्सर एक्सप्रेसवे या नेशनल हाईवे पर सफर करते हैं, तो यह खबर आपके लिए राहत भरी है। केंद्र सरकार ने टोल टैक्स से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (Ministry of Road Transport and Highways) ने टोल वसूली के पुराने तरीके की जगह नया सिस्टम लागू करने का फैसला लिया है। इसका उद्देश्य यात्रियों से उतना ही टोल लेना है, जितनी सुविधा उन्हें वास्तव में मिलती है, जिससे सफर सस्ता, पारदर्शी और ज्यादा न्यायपूर्ण होगा।
सरकार ने इस नीति को “Pay as per Road Quality” के सिद्धांत पर तैयार किया है। यानी सड़क की गुणवत्ता, उपलब्ध सुविधाओं और चालू हिस्से के आधार पर ही टोल तय किया जाएगा। यह नया नियम 15 फरवरी से पूरे देश में लागू हो चुका है, जिसके बाद कई एक्सप्रेसवे पर टोल टैक्स में सीधी कटौती (Direct reduction in toll tax) देखने को मिलेगी।
जानें क्या है नया टोल नियम-
अब तक एक्सप्रेसवे पर चलने वाले वाहन चालकों को सामान्य नेशनल हाईवे की तुलना में करीब 25 प्रतिशत तक अधिक टोल देना पड़ता था, भले ही सड़क पूरी तरह बनी हो या नहीं। नई व्यवस्था में इस सिस्टम को बदल दिया गया है। अब टोल की दरें सड़क की स्थिति, चल रहे निर्माण कार्य और उपलब्ध सुविधाओं के आधार पर तय होंगी। यदि किसी एक्सप्रेसवे के किसी हिस्से में मरम्मत या निर्माण कार्य चल रहा है, या वहां सर्विस रोड (service road) उपलब्ध नहीं है, तो उस हिस्से का टोल 50 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। इससे अधूरी सड़क पर पूरा टोल वसूलने की शिकायत खत्म होगी।
GPS आधारित टोल सिस्टम से आएगा बड़ा बदलाव-
सरकार चरणबद्ध तरीके से GPS आधारित GNSS टोल सिस्टम लागू करने की दिशा में भी काम कर रही है। इस तकनीक के आने से टोल वसूली का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा। नए सिस्टम में वाहन चालकों को पूरे एक्सप्रेसवे का टोल नहीं देना होगा, बल्कि जितनी दूरी तय की जाएगी, उतना ही टोल अपने आप FASTag या बैंक अकाउंट से कटेगा। इससे ओवरचार्जिंग की समस्या खत्म होगी और टोल भुगतान अधिक सटीक व पारदर्शी होगा।
अधूरे एक्सप्रेसवे पर अब पूरा टोल नहीं वसूला जाएगा-
पहले यदि कोई एक्सप्रेसवे पूरी तरह चालू नहीं होता था, तब भी पूरे रूट का टोल वसूला जाता था। कई मामलों में एक्सप्रेसवे का केवल आधा हिस्सा तैयार होता था और बाकी हिस्से में निर्माण कार्य चलता रहता था, फिर भी यात्रियों को पूरी दूरी के हिसाब से शुल्क देना पड़ता था। नए नियमों के तहत अब ऐसा नहीं होगा। यदि एक्सप्रेसवे पूरा नहीं बना है, तो केवल उसी हिस्से पर टोल लिया जाएगा जो पूरी तरह चालू और उपयोग के योग्य है। साथ ही उस हिस्से का टोल एक्सप्रेसवे (toll expressway) दरों पर नहीं, बल्कि सामान्य नेशनल हाईवे रेट के अनुसार वसूला जाएगा।
सरकार के अनुसार, एक्सप्रेसवे पर अधिक टोल इसलिए लिया जाता था क्योंकि ये सड़कें तेज, सुरक्षित और बिना रुकावट यात्रा के लिए डिजाइन की जाती हैं। बेहतर लेआउट, कम ट्रैफिक सिग्नल (low traffic signal) और उच्च गुणवत्ता वाली सड़कें समय की बचत करती हैं। हालांकि, जब एक्सप्रेसवे अधूरे होते हैं और जगह-जगह निर्माण कार्य चलता रहता है, तो यात्रियों को ये सुविधाएं पूरी तरह नहीं मिल पातीं। ऐसे में भी ज्यादा टोल वसूलना अनुचित माना जा रहा था, यही कारण है कि सरकार ने टोल नीति में बदलाव (Change in toll policy) किया है।
इन 4 एक्सप्रेसवे पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर-
सरकार के नए टोल नियम का असर कुछ प्रमुख एक्सप्रेसवे पर सबसे ज्यादा दिखाई देगा। ये एक्सप्रेसवे हैं-
– दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (Delhi-Meerut Expressway)
– लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे (Lucknow-Agra Expressway)
– मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे (Mumbai-Pune Expressway)
– बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे (Bundelkhand Expressway)
असल में इन मार्गों पर रोजाना भारी संख्या में वाहन गुजरते हैं, इसलिए टोल में दी जा रही राहत का फायदा लाखों यात्रियों को मिलेगा। टोल शुल्क (toll fees) कम होने से सफर की कुल लागत घटेगी। रोज़ाना दफ्तर आने-जाने वाले हों या लंबी दूरी तय करने वाले यात्री, सभी को सीधी बचत महसूस होगी। कम खर्च में तेज और सुविधाजनक यात्रा संभव होगी। वहीं, ट्रांसपोर्ट कंपनियों (transport companies) की लागत घटने से माल ढुलाई सस्ती होगी, जिसका असर रोज़मर्रा की चीज़ों की कीमतों पर भी सकारात्मक रूप से पड़ सकता है। सरकार का मकसद यही है कि अधूरे लेकिन चालू किए गए एक्सप्रेसवे हिस्सों का लोग ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें।
अब तक ज्यादा टोल होने की वजह से कई वाहन चालक नए एक्सप्रेसवे छोड़कर पुराने नेशनल हाईवे (old national highway) से सफर करना पसंद करते थे, जिससे वहां अक्सर जाम की स्थिति बन जाती थी। लेकिन टोल दरों में कमी आने के बाद लोग एक्सप्रेसवे को प्राथमिकता देंगे। इससे पुराने हाईवे पर ट्रैफिक का दबाव घटेगा (Traffic pressure on the old highway will decrease), यात्रा का समय कम होगा और जाम की समस्या में राहत मिलेगी। जब वाहन बिना रुकावट और कम भीड़ में चलेंगे, तो ईंधन की खपत भी घटेगी।
इसका सीधा फायदा यात्रियों की जेब को मिलेगा और पर्यावरण को भी राहत मिलेगी। कम ट्रैफिक से प्रदूषण घटेगा और कुल मिलाकर सफर का अनुभव बेहतर होगा। 15 फरवरी के बाद इस बदलाव के लागू होने की संभावना है, ऐसे में अगली यात्रा की योजना बनाते समय इन एक्सप्रेसवे को विकल्प के तौर पर जरूर शामिल करें।
आम यात्रियों को क्या मिलेगा फायदा-
नए नियमों का सबसे बड़ा फायदा सीधे आम लोगों को मिलेगा। अब यात्रियों को अधूरी या कम सुविधा वाली सड़क के लिए पूरा और ज्यादा टोल नहीं चुकाना पड़ेगा। रोज़ एक्सप्रेसवे से आने-जाने वाले लोग, ट्रांसपोर्ट कारोबारी (transport businessman) और लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को इससे सीधी आर्थिक राहत मिलेगी। साथ ही टोल वसूली की प्रक्रिया पहले से ज्यादा पारदर्शी होगी। यात्रियों को स्पष्ट रूप से पता रहेगा कि वे कितनी दूरी और किन सुविधाओं के लिए भुगतान कर रहे हैं, जिससे भ्रम और शिकायतों में भी कमी आएगी।
इस नई टोल नीति से सबसे अधिक फायदा दिल्ली-मेरठ, लखनऊ-आगरा (Lucknow-Agra), मुंबई-पुणे और बुंदेलखंड जैसे रूट्स पर Toll Tax पहले के मुकाबले कम हो सकता है। इससे लंबी दूरी की यात्रा ज्यादा किफायती बनेगी। अब एक्सप्रेसवे पर सफर करना न सिर्फ तेज होगा, बल्कि खर्च के मामले में भी ज्यादा समझदारी भरा साबित होगा।
इस नई टोल नीति (new toll policy) का सबसे ज्यादा असर दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (Delhi-Meerut Expressway), लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे, मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे (Mumbai-Pune Expressway) और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे जैसे रूट्स पर देखने को मिलेगा। इन मार्गों पर टोल टैक्स (toll tax) पहले के मुकाबले कम हो सकता है, जिससे लंबी दूरी की यात्रा ज्यादा किफायती बनेगी। अब एक्सप्रेसवे पर सफर न सिर्फ तेज होगा, बल्कि खर्च के लिहाज से भी ज्यादा समझदारी भरा साबित होगा।
