केंद्र सरकार के लगभग 50 लाख कर्मचारी और 69 लाख पेंशनर्स जनवरी 2026 से लागू होने वाले महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) में बढ़ोतरी का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। आमतौर पर होली से पहले इन भत्तों में संशोधन की घोषणा हो जाती है, लेकिन इस बार अप्रैल का तीसरा सप्ताह भी गुजरने के बावजूद कोई फैसला सामने नहीं आया है। इस देरी से नाराज कर्मचारी संगठनों ने अब विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है और सरकार को चेतावनी दी है कि जल्द घोषणा नहीं हुई तो आंदोलन तेज किया जाएगा।
सड़कों पर उतरे कर्मचारी संगठन
Confederation of Central Government Employees & Workers ने भत्तों की घोषणा में हो रही देरी के खिलाफ प्रदर्शन किया। संगठनों का कहना है कि सरकार को DA/DR बढ़ोतरी के फैसले को और टालना नहीं चाहिए। कर्मचारियों ने साफ कहा है कि यदि जल्द फैसला नहीं हुआ, तो बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
क्या देरी की वजह ‘पश्चिम एशिया संकट’ है?
हाल ही में हुई कैबिनेट ब्रीफिंग में DA/DR को लेकर कोई घोषणा नहीं हुई, जिसके बाद कर्मचारियों के बीच कई तरह की आशंकाएं पैदा हो गईं। कुछ संगठनों ने यह सवाल भी उठाया कि कहीं ‘पश्चिम एशिया संकट’ के कारण सरकार इस फैसले में देरी तो नहीं कर रही। यहां तक कि कुछ लोगों ने कोरोनाकाल की तरह DA/DR फ्रीज होने की संभावना भी जताई है।
इस मुद्दे को लेकर कर्मचारी संगठनों ने वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman को पत्र लिखकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
पहले भी दिया जा चुका है नोटिस
संगठन के प्रतिनिधियों के अनुसार, प्रदर्शन से पहले 14 अप्रैल को कैबिनेट सचिव को औपचारिक सूचना दी गई थी। देशभर में लंच-ऑवर के दौरान यह विरोध दर्ज कराया गया, ताकि सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित किया जा सके। कर्मचारियों का कहना है कि यदि स्थिति जल्द साफ नहीं हुई, तो बड़े पैमाने पर आंदोलन किया जाएगा।
60% के पार जा सकता है DA/DR
जुलाई 2025 में केंद्र सरकार ने DA/DR में 3% की बढ़ोतरी की थी, जिसके बाद दर 58% तक पहुंच गई थी। अब जनवरी 2026 के लिए नए संशोधन का इंतजार है। अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI-IW) के ताजा आंकड़ों के अनुसार DA में 2% से 3% तक बढ़ोतरी संभव है, जिससे कुल दर 60% या उससे अधिक हो सकती है।
आखिर देरी क्यों हो रही है?
विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी लंबी देरी असामान्य है, क्योंकि पिछले 10–15 वर्षों में आमतौर पर मार्च तक यह घोषणा हो जाती थी। इस बार देरी के पीछे संभावित कारणों को लेकर स्पष्टता नहीं है, जिससे कर्मचारियों में असमंजस बना हुआ है।
