Gold Reserve Update: वैश्विक तनाव के बीच इन देशों ने सोने की खरीद में मारी बाजी, भारत-चीन पीछे
दुनिया भर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच कई देशों के सेंट्रल बैंक तेजी से सोना खरीद रहे हैं। सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के तौर पर गोल्ड की मांग बढ़ने से देश अपने Gold Reserve को मजबूत करने में जुटे हैं।
सोने की खरीद में तेज हुआ ट्रेंड
वैश्विक अनिश्चितता के माहौल में सेंट्रल बैंक लगातार सोना जमा कर रहे हैं। इसका मकसद अपने विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित बनाना और आर्थिक जोखिम को कम करना है।
भारत और चीन की रफ्तार क्यों धीमी पड़ी?
जहां एक ओर कई छोटे और मध्यम देश तेजी से सोना खरीद रहे हैं, वहीं भारत और चीन जैसे बड़े देश हाल के महीनों में खरीदारी के मामले में पीछे नजर आए हैं।
पोलैंड बना सबसे बड़ा खरीदार
पोलैंड ने फरवरी 2026 में सबसे ज्यादा 20 टन सोना खरीदा, जो उस महीने की सबसे बड़ी खरीद थी।
- कुल गोल्ड रिजर्व: करीब 570 टन
- पिछले 1 साल में खरीद: लगभग 102 टन
इस आक्रामक खरीदारी ने पोलैंड को गोल्ड रिजर्व के मामले में तेजी से आगे बढ़ा दिया है।
उज्बेकिस्तान भी तेजी से बढ़ा रहा भंडार
उज्बेकिस्तान भी इस दौड़ में पीछे नहीं है।
- फरवरी 2026 में खरीद: 8 टन
- कुल रिजर्व: करीब 407 टन
2025 के दौरान भी उज्बेकिस्तान ने करीब 10–15 टन सोना जोड़ा था, जिससे उसका भंडार लगातार मजबूत हो रहा है।
भारत की खरीदारी रही सीमित
भारत ने फरवरी 2026 में सिर्फ 0.2 टन सोना खरीदा।
हालांकि, देश का कुल गोल्ड रिजर्व अभी भी मजबूत है और करीब 880 टन के आसपास बना हुआ है।
चीन ने भी धीमी की रफ्तार
चीन, जो पिछले वर्षों में आक्रामक खरीद के लिए जाना जाता है, उसने फरवरी में सिर्फ 1 टन सोना जोड़ा।
- कुल गोल्ड रिजर्व: करीब 2305 टन
- पिछले वर्षों में खरीद: लगभग 225 टन
निष्कर्ष
वैश्विक तनाव के माहौल में छोटे और उभरते देश तेजी से सोना खरीदकर अपने भंडार को मजबूत कर रहे हैं। वहीं भारत और चीन जैसे बड़े देश फिलहाल धीमी गति से आगे बढ़ रहे हैं।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या बड़े देश भी अपनी खरीदारी तेज करते हैं या छोटे देश ही इस दौड़ में आगे बने रहते हैं।
