हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम में 10-15% बढ़ोतरी का अलर्ट! मेडिकल इन्फ्लेशन 14-15% पहुंचा, अस्पताल खर्चों ने बीमा कंपनियों पर दबाव बनाया। अगले 12-18 महीनों में रिन्यूअल पर चरणबद्ध हाइक, सीनियर सिटिजन व मेट्रो शहरों पर सबसे ज्यादा असर। बचाव: फैमिली फ्लोटर, टॉप-अप प्लान लें, समय पर रिन्यू करें। 2021-25 में 46% पहले ही महंगा!
आने वाले समय में हेल्थ इंश्योरेंस लेना या रिन्यू करना लाखों परिवारों के लिए महंगा साबित हो सकता है। इंडस्ट्री विशेषज्ञों के अनुसार, अगले 12 से 18 महीनों में प्रीमियम में 10 से 15 फीसदी तक की बढ़ोतरी अपरिहार्य है। यह बदलाव एक झटके में नहीं, बल्कि पॉलिसी रिन्यूअल के दौरान चरणबद्ध तरीके से लागू होगा, ताकि आम ग्राहकों पर अचानक दबाव न पड़े।
हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर में यह ट्रेंड नया नहीं है। वित्त वर्ष 2023 से 2025 के बीच व्यक्तिगत हेल्थ पॉलिसी के प्रीमियम औसतन 23 फीसदी महंगे हो चुके हैं। जहां 2021 में फैमिली फ्लोटर प्लान का औसत वार्षिक प्रीमियम 15,000 रुपये था, वहीं 2025 तक यह 22,000 रुपये के पार पहुंच गया, यानी करीब 46 फीसदी की छलांग। बड़े शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में रहने वाले लोग, साथ ही सीनियर सिटिजन इस बढ़ोतरी से सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। उम्र, निवास स्थान, सम इंश्योर्ड वैल्यू और पिछले क्लेम हिस्ट्री जैसे कारकों पर निर्भर प्रीमियम में टियर-2 शहरों के मुकाबले मेट्रो शहरों में 20-25 फीसदी ज्यादा इजाफा हो सकता है। उदाहरणस्वरूप, 5 लाख रुपये के कवर वाली 50 वर्षीय व्यक्ति की पॉलिसी का प्रीमियम 8,000 से बढ़कर 10,000-11,000 रुपये सालाना हो सकता है।
बढ़ोतरी के पीछे जड़ें: मेडिकल इन्फ्लेशन का कहर
इस बढ़ोतरी का प्राथमिक कारण देश में स्वास्थ्यखर्चों का रॉकेट जैसा उछाल है। भारत में मेडिकल इन्फ्लेशन 14-15 फीसदी सालाना है, जो सामान्य महंगाई दर (4-6 फीसदी) से चार गुना अधिक है। अस्पतालों के रूम चार्ज, सर्जरी की फीस, एडवांस डायग्नोस्टिक टेस्ट जैसे एमआरआई-सीटी स्कैन और महंगे इंपोर्टेड दवाओं की कीमतें बेलगाम हो रही हैं। कोविड-19 महामारी के बाद टलते इलाजों का बोझ एक साथ आया, जिससे क्लेम रेशियो 90-100 फीसदी तक पहुंच गया। क्रॉनिक बीमारियां जैसे डायबिटीज, हृदयरोग और कैंसर के मरीज बढ़े हैं, जो लंबे इलाज और हाई कॉस्ट वाली दवाओं पर निर्भर हैं।
IRDAI के हालिया नियमों ने भी बीमा कंपनियों को प्रीमियम रिव्यू के लिए मजबूर किया है। मौजूदा बीमारियों के लिए वेटिंग पीरियड घटाने, कैशलेस क्लेम्स को तेज करने और बेहतर कवरेज फीचर्स जैसे बदलावों से कंपनियों का खर्च बढ़ा है। स्टैंडअलोन हेल्थ इंश्योरर्स जैसे स्टार हेल्थ ने पहले ही कुछ प्लान्स में 10 फीसदी हाइक कर दिया। कुल मिलाकर, हेल्थ इंश्योरेंस मार्केट का प्रीमियम पूल 1.2 लाख करोड़ रुपये पार कर चुका है, लेकिन बढ़ते क्लेम्स से कंपनियां घाटे में हैं। 2020 के बाद अस्पताल भर्ती की औसत लागत दोगुनी हो चुकी है।
ग्राहकों पर असर: मध्यम वर्ग सबसे ज्यादा चपेट में
यह बढ़ोतरी मध्यम वर्गीय परिवारों की जेब पर भारी पड़ेगी, खासकर जब महंगाई पहले ही चरम पर है। ग्रामीण क्षेत्रों में कवरेज बढ़ा है, लेकिन OPD खर्च और डेंटल-मैटरनिटी जैसे एक्सक्लूजन अब भी समस्या हैं। सीनियर सिटिजन्स के लिए 15-35 फीसदी तक का हाइक बोझिल साबित होगा, क्योंकि उनकी मेडिकल जरूरतें अधिक होती हैं। बिना इंश्योरेंस के इलाज का खर्च 5-10 लाख रुपये आसानी से पार कर जाता है, इसलिए पॉलिसी छोड़ना घातक हो सकता है।
बचाव के सशक्त उपाय: अभी एक्शन लें
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पॉलिसी समय पर रिन्यू करें, ताकि कंटिन्यूअस कवर बरकरार रहे। कम कवर न लें; न्यूनतम 10 लाख रुपये का सम इंश्योर्ड चुनें। फैमिली फ्लोटर प्लान अपनाएं, जो एक प्रीमियम पर पूरे परिवार को कवर करता है। डिडक्टिबल (5,000-10,000 रुपये) या को-पेमेंट जोड़कर 10-20 फीसदी बचत करें। टॉप-अप प्लान लें, जो बेसिक कवर के ऊपर सुपरटॉप-अप देता है। युवावस्था में पॉलिसी खरीदें, जहां 10 फीसदी डिस्काउंट मिलता है।
लॉन्ग-टर्म (2-3 वर्ष) पॉलिसी पर छूट पाएं और नो-क्लेम बोनस का लाभ उठाएं, जो कवर 50 फीसदी तक बढ़ा देता है। ऑनलाइन पोर्टल्स पर 5-10 कंपनियों की तुलना करें। पॉलिसी बंद न करें, वरना इमरजेंसी में आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च लाखों में होगा। हेल्थ इंश्योरेंस अब लग्जरी नहीं, जरूरत है। सरकार को भी बजट 2026 में हॉस्पिटल बिल्स पर राहत के प्रावधान करने चाहिए। ग्राहक सतर्क रहें, क्योंकि मेडिकल इन्फ्लेशन का सिलसिला जारी रहेगा।
