नई दिल्ली: मई के आखिर के साथ देश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी का असर तेजी से बढ़ने लगा है। मार्च और अप्रैल में मौसम ने कई बार करवट बदली, लेकिन अब तापमान लगातार नए रिकॉर्ड छू रहा है। कई शहरों में पारा 45°C से 48°C तक पहुंच चुका है और आने वाले दिनों में नौतपा के दौरान गर्मी और बढ़ने की आशंका है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इंसान का शरीर कितनी गर्मी सह सकता है? किस तापमान के बाद शरीर के अंग काम करना बंद कर देते हैं और गर्मी जानलेवा बन जाती है? मेडिकल साइंस और वैज्ञानिक रिसर्च इस सवाल का जवाब काफी स्पष्ट तरीके से देती हैं।
इंसान का शरीर कितनी गर्मी झेल सकता है?
विशेषज्ञों के अनुसार, एक स्वस्थ इंसान सामान्य रूप से 35°C से 40°C तक के बाहरी तापमान को सहन कर सकता है। लेकिन जैसे ही तापमान 40°C से ऊपर जाता है, शरीर को खुद को ठंडा रखने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है।
अगर वातावरण में नमी कम हो और व्यक्ति पर्याप्त पानी पीता रहे, तो शरीर कुछ समय के लिए 45°C से 50°C तक की गर्मी भी झेल सकता है। हालांकि 50°C के बाद स्थिति बेहद खतरनाक मानी जाती है।
वैज्ञानिकों के मुताबिक इंसान का सामान्य शरीर तापमान लगभग 37°C यानी 98.6°F होता है। शरीर का तापमान नियंत्रित रखने का काम दिमाग के हाइपोथैलेमस हिस्से द्वारा किया जाता है। यही शरीर को पसीना निकालने और खुद को ठंडा रखने के संकेत देता है।
शरीर के अंदर और बाहर के तापमान का खेल
बाहरी तापमान
यह वह तापमान होता है जो मौसम विभाग बताता है या जो हमें बाहर महसूस होता है।
शरीर का अंदरूनी तापमान
इसे कोर बॉडी टेम्परेचर कहा जाता है। सामान्य स्थिति में यह 36.5°C से 37.5°C के बीच रहता है।
जब बाहर की गर्मी बढ़ती है, तो शरीर पसीने के जरिए खुद को ठंडा करता है। पसीना सूखने पर शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है। लेकिन अगर यह प्रक्रिया रुक जाए, तो खतरा बढ़ जाता है।
क्या है ‘वेट बल्ब तापमान’?
सिर्फ गर्मी ही नहीं, बल्कि उमस यानी ह्यूमिडिटी भी इंसानी शरीर के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। वैज्ञानिक इसे मापने के लिए ‘वेट बल्ब तापमान’ का इस्तेमाल करते हैं।
यह तापमान और नमी का संयुक्त माप होता है, जो बताता है कि शरीर पसीने के जरिए खुद को ठंडा कर पाएगा या नहीं।
सबसे खतरनाक स्थिति कब होती है?
विशेषज्ञों के अनुसार:
- 35°C वेट बल्ब तापमान इंसानी जीवन की अंतिम सीमा मानी जाती है
- यानी अगर तापमान 35°C हो और नमी 100% हो
- या तापमान 46°C हो और नमी 50% हो
तो शरीर का कूलिंग सिस्टम पूरी तरह फेल हो सकता है। ऐसी स्थिति में इंसान कुछ घंटों के भीतर जान गंवा सकता है।
शरीर के अंगों पर गर्मी का असर
जब शरीर का अंदरूनी तापमान 40°C या उससे ऊपर पहुंच जाता है, तो कई अंग प्रभावित होने लगते हैं।
दिमाग
गर्मी से दिमाग में सूजन आ सकती है। व्यक्ति कन्फ्यूज हो सकता है, बोलने में दिक्कत हो सकती है और बेहोशी तक आ सकती है।
दिल
दिल को शरीर को ठंडा रखने के लिए ज्यादा तेजी से काम करना पड़ता है। इससे हार्ट रेट बढ़ जाती है और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है।
किडनी और लिवर
डिहाइड्रेशन के कारण खून गाढ़ा हो जाता है और किडनी सही तरह से काम नहीं कर पाती। इससे किडनी फेल होने का खतरा बढ़ जाता है।
शरीर की कोशिकाएं
अत्यधिक गर्मी में शरीर के अंदर मौजूद प्रोटीन टूटने लगते हैं। इससे कोशिकाएं नष्ट होने लगती हैं और अंग धीरे-धीरे काम करना बंद कर देते हैं।
हीट स्ट्रोक के अलग-अलग चरण
Heat Cramps
मांसपेशियों में दर्द और ऐंठन शुरू हो जाती है। शरीर में पानी और नमक की कमी होने लगती है।
Heat Exhaustion
चक्कर आना, कमजोरी, सिरदर्द और उल्टी जैसा महसूस होना शुरू हो जाता है। शरीर का तापमान 38°C से 39°C तक पहुंच सकता है।
Heat Stroke
यह सबसे खतरनाक स्थिति होती है। जब शरीर का तापमान 40°C या उससे ऊपर पहुंच जाता है और पसीना आना बंद हो जाता है, तो यह मेडिकल इमरजेंसी बन जाती है।
गर्मी से बचने के लिए क्या करें?
लगातार पानी पिएं
प्यास न लगे तब भी नियमित रूप से पानी, ORS, नींबू पानी या छाछ पीते रहें।
दोपहर की धूप से बचें
12 बजे से 4 बजे के बीच बाहर निकलने से बचें।
हल्के कपड़े पहनें
ढीले और कॉटन के कपड़े शरीर को ठंडा रखने में मदद करते हैं।
लक्षण दिखें तो तुरंत सावधान हों
अगर चक्कर, कमजोरी या उल्टी जैसा महसूस हो, तो तुरंत ठंडी जगह पर जाएं और शरीर को ठंडा करें।
गर्मी अब सिर्फ मौसम नहीं, स्वास्थ्य संकट बन रही
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से हीटवेव अब पहले से ज्यादा खतरनाक होती जा रही है। इसलिए शरीर की सीमाओं को समझना और समय रहते सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।
