मुंग की खेती भारत में की जाती है।यह भारत में उगाई जाने वाली दलहनी फसलों में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखती है।मुंग की खेती किसान कम लागत और कम समय में खरीफ,रबी और जायद तीनो सीजन में कर सकते है।मुंग में प्रोटीन और पोषक तत्व पाए जाते है मुंग की खेती मध्य प्रदेश,गुजरात,हरियाणा,महाराष्ट,आंध्र प्रदेश,कर्नाटक,उत्तर प्रदेश में की जाती है।
मुंग की खेती के लिए ऐसा करे खेत तैयार
अगर किसान खरीफ सीजन में मुंग की फसल को लगाने की सोच रहे है तो उन्हें खेतो में 2 से 3 बार वर्षा पड़ने के बाद गहरी जुताई का काम करे।इससे मिट्टी में छिपे कीड़े बाहर आ जाते है और खरपतवार नष्ट हो जाती है।इसके अलावा गहरी जुताई करने से मुंग फसल की उत्पादकता भी बढ़ती है और अच्छी व स्वस्थ फसल प्राप्त होती है।किसानो को खेत में गहरी जुताई करने के लिए बाद पटा चलकर उसे समतल कर लेना चाहिए।इसके बाद आपको खेत में जरुरी पोषक तत्व और गोबर की खाद मिला लेना चाहिए,जिससे अच्छा उत्पादन प्राप्त हो सकता है।
ऐसे करे खेत की बुवाई
खेत में मुंग की बुवाई करने से पहले बीजो का बीज शोधन जरूर कर लेना चाहिए।ऐसा करने से स्वस्थ और रोगमुक्त फसल प्राप्त करने में मदद मिलती है।आपको अपने खेतो में मुंग के बीजो की बुवाई कतार में करनी चाहिए,जिससे निराई और गुड़ाई करने में आपके लिए आसानी रहे और खरपतवार को समय से निकाला जा सके।
सिचाई
मुंग फसल के लिए ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती। 2 से 3 बारिशो में ही फसल को अच्छी नमी मिल जाती है।लेकिन फिर भी फलिया बनते समय खेतो में हल्की सिचाई लगा देनी चाहिए।शाम के समय हल्की सिचाई लगाने से मिट्टी को नमि मिल जाती है।ध्यान रखे की फसल पकने के 15 दिन पहले ही सिचाई का काम बंद कर दे।
कटाई कब करे
खरीफ सीजन की मुंग फसल कम समय में पकने वाली फसलों में से एक है।इस फसल को पककर तैयार होने में लगभग 65 से 70 दिनों का समय लगता है।अगर जून जुलाई में मुंग की बुवाई की जाए तो सितंबर अक्टूबर के बीच इसक फसल पककर तैयार हो जाती है।जब मुंग की फसल में आने वाल फलियों का रंग हरे से भूरे कलर को होने लगे तो आपको कटाई गहाई का काम समय रहते कर लेना चाहिए।
