“रात 10 बजे कट जाएगी बिजली” जैसे डरावने मैसेज से साइबर ठग बैंक खाते खाली कर रहे हैं। प्रीपेड मीटर अपडेट के नाम पर फर्जी ऐप लिंक भेजकर OTP चुराते हैं। UPPCL कभी लिंक नहीं मांगता। अज्ञात कॉल इग्नोर करें, 1930 पर रिपोर्ट करें। जागरूकता से बचें- लाखों खतरे में।
टेक्नोलॉजी ने जीवन को सरल बना दिया है, लेकिन यही तकनीक अब हर रोज नई-नई ठगी के रूप में सामने आ रही है। गैस बुकिंग स्कैम की मार अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि अब प्रीपेड इलेक्ट्रिसिटी मीटर के नाम पर एक खतरनाक साइबर घोटाला पूरे उत्तर प्रदेश में फैल चुका है। ठगों के गिरोह फोन कॉल और व्हाट्सएप मैसेज के जरिए बिजली उपभोक्ताओं को अपना शिकार बना रहे हैं। “रात 10 बजे बिजली कट जाएगी” जैसे भयभीत करने वाले संदेश भेजकर वे लोगों को घबराहट में फंसा देते हैं।
बुलंदशहर इस स्कैम का केंद्र बन चुका है, जहां स्मार्ट मीटर अपडेट के बहाने बैंक खाते खाली हो रहे हैं। ऊर्जा निगम ने अलर्ट जारी कर दिया है, लेकिन जागरूकता की कमी से आम आदमी अब भी फंस रहा है।
स्कैम की चालाकी भरी रणनीति
यह स्कैम बेहद चालाकी से रचा गया है। ठग पहले व्हाट्सएप या एसएमएस पर मैसेज भेजते हैं, जिसमें लिखा होता है कि आपका बिजली बिल अपडेट नहीं हुआ, इसलिए कनेक्शन कटने वाला है। नंबर जैसे 8489150490 से कॉल आती है, जिसमें खुद को ऊर्जा निगम का अधिकारी बताते हुए वे कहते हैं, “सिस्टम में गड़बड़ी के कारण पिछले महीने का बिल रजिस्टर नहीं हुआ। तुरंत अपडेट करें वरना रात 10 बजे बिजली चली जाएगी।” घबराए उपभोक्ता को वे एक फर्जी ऐप का लिंक भेजते हैं।
लिंक क्लिक करते ही एंड्रॉयड फोन पर ऐप ऑटोमैटिक इंस्टॉल हो जाता है। यह मैलवेयर ऐप बैकग्राउंड में काम करता है- बैंकिंग ऐप्स के डेटा चुराता है, OTP कैप्चर करता है और UPI पिन्स तक हथिया लेता है। नतीजा? खाता जीरो हो जाता है। बुलंदशहर में पिछले हफ्ते दर्जनों शिकायतें दर्ज हुईं, जहां लोग 50 हजार से लेकर लाखों तक गंवा चुके हैं।
बुलंदशहर: स्कैम का एपिसेंटर
बुलंदशहर का केस सबसे ताजा और डरावना है। यहां स्मार्ट प्रीपेड मीटर वाले इलाकों को निशाना बनाया जा रहा है। एक वीडियो में दिखाया गया कि ठग मीटर रीडिंग अपडेट का लॉलीपॉप देकर लिंक भेजते हैं। स्थानीय पुलिस ने पुष्टि की कि यह अंतरराज्यीय गिरोह का काम है, जो राजस्थान और बिहार से भी सक्रिय है। पहले गैस सिलेंडर बुकिंग के नाम पर लॉटरी स्कैम चला, अब बिजली का नया जाल बिछा दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रीपेड मीटर की बढ़ती संख्या ने ठगों को नया मौका दिया है।
उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने स्पष्ट किया कि वे कभी फोन पर लिंक या ऐप डाउनलोड नहीं करवाते। बिल चेक करने के लिए सिर्फ आधिकारिक वेबसाइट या ऐप ही इस्तेमाल करें।
बचाव के आसान लेकिन जरूरी उपाय
ऐसे स्कैम से बचना आसान है, अगर सतर्क रहें। सबसे पहले, किसी अज्ञात नंबर से कॉल या मैसेज आए तो इग्नोर करें। बिजली बिल की जानकारी हमेशा UPPCL की ऑफिशियल साइट upenergy.in या मोबाइल ऐप से वेरिफाई करें। फोन पर कभी बैंक डिटेल्स, OTP या पिन शेयर न करें- कोई सरकारी कंपनी ऐसा नहीं मांगती। अगर लिंक आता है तो उसे डिलीट कर दें; क्लिक करने से मैलवेयर फैलता है।
संदिग्ध मामलों में तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या नजदीकी थाने में FIR दर्ज कराएं। फोन सिक्योर रखने के लिए प्ले प्रोटेक्ट चालू रखें और अनजान ऐप्स इंस्टॉल न करें। बुलंदशहर पुलिस ने हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं- 1090 (महिला हेल्पलाइन) और 112 (इमरजेंसी)।
देशव्यापी खतरा और जागरूकता की जरूरत
यह स्कैम सिर्फ उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं। दिल्ली, हरियाणा, बिहार में भी ऐसे मामले सामने आ चुके हैं। साइबर क्राइम पोर्टल पर पिछले एक साल में सैकड़ों शिकायतें दर्ज हैं। सरकार ने डिजिटल इंडिया के तहत जागरूकता कैंपेन शुरू किए हैं, लेकिन ठग तेजी से नई ट्रिक्स अपना रहे। प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं को खास अलर्ट रहना होगा। अगर आपका मीटर स्मार्ट है, तो नियमित बिलिंग ऐप से मॉनिटर करें। याद रखें, जल्दबाजी में लिया फैसला महंगा पड़ता है। जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है। ऊर्जा निगम ने चेतावनी दी है कि फर्जी कॉल्स पर कार्रवाई होगी। आइए, इस जाल से बचें और अपनों को भी बताएं। सुरक्षित रहें, सतर्क रहें।
