नई दिल्ली: भारत में इस साल सोने की मांग पर बड़ा असर पड़ सकता है। विश्व स्वर्ण परिषद यानी World Gold Council (WGC) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, सरकार द्वारा गोल्ड पर आयात शुल्क बढ़ाने के बाद देश में सोने की डिमांड में करीब 10 फीसदी तक गिरावट आने की आशंका है। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वर्ष 2026 के दौरान भारत में गोल्ड की कुल मांग 50 से 60 टन तक कम हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आयात शुल्क बढ़ने से न केवल सोने की कीमतें प्रभावित होंगी, बल्कि तस्करी के मामलों में भी तेजी देखने को मिल सकती है।
सरकार ने बढ़ाया आयात शुल्क
केंद्र सरकार ने सोने पर आयात शुल्क 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया है। इसे अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी माना जा रहा है। इससे पहले जुलाई 2024 में सरकार ने गोल्ड पर शुल्क में कटौती की थी, लेकिन अब नई बढ़ोतरी ने उस राहत को पूरी तरह खत्म कर दिया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा लोगों से कुछ समय तक सोना खरीदने से बचने की अपील के बाद भी बाजार पर असर पड़ा है।
2026 में कितनी घट सकती है गोल्ड डिमांड?
WGC की रिपोर्ट के अनुसार:
- आभूषण, गोल्ड बार और सिक्कों की कुल मांग में 50-60 टन तक कमी आ सकती है
- यह पिछले साल की तुलना में लगभग 10 फीसदी कम होगी
- महंगाई, मानसून और आय स्तर जैसे फैक्टर्स भी डिमांड को प्रभावित करेंगे
विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती कीमतों के कारण लोग गोल्ड खरीदने से बच सकते हैं, खासकर निवेश के उद्देश्य से।
निवेश और ज्वेलरी डिमांड में क्या फर्क?
रिपोर्ट में कहा गया है कि गोल्ड निवेश और ज्वेलरी की मांग पर आयात शुल्क का असर अलग-अलग तरीके से पड़ता है।
निवेश मांग ज्यादा प्रभावित
सोने की छड़ और सिक्कों जैसे निवेश उत्पादों की मांग आयात शुल्क और कीमतों में बदलाव के प्रति ज्यादा संवेदनशील मानी जाती है।
ज्वेलरी डिमांड अपेक्षाकृत स्थिर
भारत में शादी-ब्याह और पारंपरिक आयोजनों में सोना खरीदना जरूरी माना जाता है। यही वजह है कि ज्वेलरी डिमांड पर शुल्क का असर अपेक्षाकृत कम पड़ता है।
तस्करी बढ़ने का भी खतरा
विश्व स्वर्ण परिषद ने अपनी रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि आयात शुल्क बढ़ने से गोल्ड स्मगलिंग यानी तस्करी बढ़ सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार:
- 2013 में आयात शुल्क बढ़ने के बाद अवैध गोल्ड इंपोर्ट तेजी से बढ़ा था
- उस समय अनधिकृत आयात 10 टन से बढ़कर 70 टन तक पहुंच गया था
- एक बार स्मगलिंग नेटवर्क बनने के बाद उसे खत्म करना मुश्किल हो जाता है
इसी तरह 2022 में शुल्क बढ़ने के बाद भी तस्करी में तेजी देखी गई थी।
क्यों बढ़ रही है चिंता?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आयात शुल्क लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बना रहता है, तो:
- घरेलू बाजार में सोने की सप्लाई कम हो सकती है
- कीमतों में और तेजी आ सकती है
- तस्करी का नेटवर्क फिर मजबूत हो सकता है
इसका असर ज्वेलरी कारोबार, निवेश बाजार और सरकार के राजस्व तीनों पर पड़ सकता है।
आने वाले समय में क्या हो सकता है?
गोल्ड मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार आने वाले महीनों में:
- गोल्ड की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है
- शादी के सीजन में मांग बनी रह सकती है
- निवेशक सुरक्षित विकल्प के तौर पर गोल्ड में रुचि दिखा सकते हैं
हालांकि बढ़े हुए आयात शुल्क के कारण बाजार में सप्लाई और डिमांड का संतुलन प्रभावित होने की संभावना बनी हुई है।
