15 अप्रैल को सोने की कीमतों में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मजबूती देखने को मिली। एक दिन पहले गिरावट के बाद गोल्ड ने फिर से रिकवरी दिखाई, जिससे निवेशकों का भरोसा वापस बढ़ा है।
MCX और ग्लोबल मार्केट में सोने की चाल
भारत में Multi Commodity Exchange of India (MCX) पर शाम के कारोबार के दौरान गोल्ड फ्यूचर्स करीब 0.81% बढ़कर ₹1,53,301 प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड करता नजर आया।
वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड करीब 0.78% चढ़कर $4,782.53 प्रति औंस पहुंच गया। दिन के दौरान इसमें 1% से ज्यादा की तेजी भी देखी गई।
यूएस गोल्ड फ्यूचर्स में भी इसी तरह की सकारात्मक चाल रही।
एक दिन पहले आई थी गिरावट
14 अप्रैल को सोने की कीमतें एक हफ्ते के निचले स्तर तक फिसल गई थीं।
इस गिरावट के पीछे प्रमुख कारण थे:
- अमेरिका द्वारा ईरान के बंदरगाहों पर प्रतिबंध की घोषणा
- अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का बेनतीजा रहना
- मध्यपूर्व में बढ़ती अनिश्चितता
इन घटनाओं ने बाजार में अस्थिरता बढ़ाई, जिसका असर गोल्ड पर भी पड़ा।
मिडिल ईस्ट तनाव और गोल्ड का रिश्ता
विशेषज्ञों के मुताबिक, सोने की कीमतों पर मध्यपूर्व की स्थिति का सीधा असर पड़ता है।
सैक्सो बैंक के कमोडिटी स्ट्रेटेजी हेड Ole Hansen का कहना है कि अगर क्षेत्र में तनाव कम होता है, तो कीमती धातुओं को सपोर्ट मिल सकता है।
उन्होंने यह भी बताया कि डॉलर में कमजोरी आने पर सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखी जाती है।
डॉलर में कमजोरी से बढ़ा गोल्ड का आकर्षण
हाल के दिनों में अमेरिकी डॉलर करीब एक महीने के निचले स्तर पर आ गया है।
जब डॉलर कमजोर होता है, तो दूसरी करेंसी में सोना खरीदना सस्ता हो जाता है—जिससे इसकी मांग बढ़ती है और कीमतों को सहारा मिलता है।
हालांकि, शॉर्ट टर्म में कीमतें सीमित दायरे में रहने की संभावना जताई जा रही है।
लंबी अवधि में बड़ा उछाल संभव
विशेषज्ञों का मानना है कि मीडियम और लॉन्ग टर्म में सोना मजबूत प्रदर्शन कर सकता है।
- इस साल गोल्ड $6,000 प्रति औंस (लगभग ₹1.88 लाख प्रति 10 ग्राम) तक जा सकता है
- JPMorgan Chase ने तो इसका टारगेट $6,300 प्रति औंस तक बताया है
यह संकेत देता है कि आने वाले समय में सोना निवेश के लिहाज से और आकर्षक बन सकता है।
हालिया प्रदर्शन कैसा रहा?
- पिछले साल गोल्ड ने करीब 64% का रिटर्न दिया
- जनवरी 2026 के अंत में कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचीं
- उसके बाद तेज गिरावट आई
- अब फिर से रिकवरी का ट्रेंड दिख रहा है
आमतौर पर जियोपॉलिटिकल तनाव बढ़ने पर सोने में तेजी आती है, लेकिन हाल के कुछ घटनाक्रमों में डॉलर की मजबूती के कारण कीमतों पर दबाव भी देखा गया।
निवेशकों के लिए एक्सपर्ट्स की सलाह
विशेषज्ञों का मानना है कि हर निवेशक के पोर्टफोलियो में 10% से 15% तक गोल्ड होना चाहिए।
इसके फायदे:
- पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन
- मार्केट रिस्क कम करना
- लंबी अवधि में स्थिर रिटर्न
अगर आपके पोर्टफोलियो में गोल्ड की हिस्सेदारी कम है, तो आप इसमें निवेश पर विचार कर सकते हैं।
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निष्कर्ष
गोल्ड की कीमतों में हालिया उतार-चढ़ाव के बावजूद, लंबी अवधि का ट्रेंड अभी भी सकारात्मक नजर आ रहा है।
मध्यपूर्व के हालात, डॉलर की चाल और ग्लोबल इकोनॉमिक फैक्टर्स आगे की दिशा तय करेंगे।
फिलहाल, संकेत यही हैं कि सही रणनीति के साथ सोना निवेशकों के लिए एक मजबूत विकल्प बना रह सकता है।
