वैश्विक तनाव बढ़ने के बावजूद सोना और चांदी उम्मीद के उलट गिरावट दिखा रहे हैं। आमतौर पर जियोपॉलिटिकल तनाव के समय गोल्ड- सिल्वर को सुरक्षित निवेश (Safe Haven) माना जाता है, लेकिन इस बार बाजार की दिशा कुछ अलग नजर आ रही है।
क्यों दबाव में हैं सोना-चांदी?
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और संभावित युद्ध जैसी स्थिति ने शेयर बाजार से लेकर कमोडिटी मार्केट तक असर डाला है। हालांकि, इसके बावजूद सोना-चांदी में तेजी नहीं आ रही।
विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे मुख्य कारण हैं:
- अमेरिकी डॉलर की मजबूती
- कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें
- सुरक्षित निवेश की घटती मांग
तेल महंगा होने से महंगाई की आशंका बढ़ती है, जिससे डॉलर मजबूत होता है—और यही फैक्टर सोना-चांदी की कीमतों को दबाव में ला रहा है।
हालिया गिरावट कितनी बड़ी रही?
अमेरिका-ईरान तनाव शुरू होने के बाद:
- सोने में 8% से ज्यादा गिरावट
- चांदी में 16% से अधिक गिरावट
हालांकि हाल में मामूली रिकवरी भी दिखी:
- कॉमेक्स पर सोना करीब $4,800 प्रति औंस
- चांदी करीब $77 प्रति औंस के आसपास ट्रेड कर रही है
अमेरिका-ईरान तनाव का असर
होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका की कार्रवाई और बढ़ते तनाव ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ाई।
इस बीच, Donald Trump ने संकेत दिए कि ईरान बातचीत के लिए तैयार है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, Masoud Pezeshkian ने भी अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत शांति वार्ता जारी रखने की बात कही है।
तेल की कीमतों से तय होगा ट्रेंड
तनाव कम होने की खबरों के बाद तेल की कीमतें गिरकर $100 प्रति बैरल से नीचे आ गईं।
इसका असर:
- शेयर बाजार में सुधार
- डॉलर इंडेक्स में कमजोरी
- सोने को सपोर्ट
जब ऊर्जा की कीमतें कम होती हैं, तो महंगाई का दबाव घटता है—जिससे गोल्ड- सिल्वर को मजबूती मिल सकती है।
एक्सपर्ट की चेतावनी: कब आ सकता है क्रैश?
Kotak Securities की कमोडिटी रिसर्च टीम के अनुसार:
👉 अगर कच्चा तेल $120 प्रति बैरल से ऊपर बना रहता है:
- महंगाई लंबे समय तक ऊंची रह सकती है
- ब्याज दरें हाई बनी रहेंगी
- डॉलर मजबूत रहेगा
- सोना-चांदी में बड़ी गिरावट का खतरा बढ़ेगा
👉 संभावित गिरावट:
- सोना: $4,400 से नीचे
- चांदी: $67 से नीचे
दूसरी तरफ क्या है पॉजिटिव संकेत?
अगर कच्चा तेल $90 प्रति बैरल से नीचे आ जाता है:
- महंगाई का दबाव कम होगा
- डॉलर कमजोर पड़ सकता है
- सोने-चांदी को मजबूती मिलेगी
👉 संभावित तेजी:
- सोना: $5,000+ प्रति औंस
- चांदी: $80+ प्रति औंस
निवेशकों के लिए क्या मतलब?
- शॉर्ट टर्म में बाजार अस्थिर रह सकता है
- कीमतें तेल, डॉलर और जियोपॉलिटिक्स पर निर्भर रहेंगी
- सही समय पर एंट्री और एग्जिट जरूरी है
निष्कर्ष
इस समय सोना-चांदी की दिशा पूरी तरह ग्लोबल फैक्टर्स पर निर्भर है।
तेल की कीमतें, डॉलर की चाल और मिडिल ईस्ट की स्थिति मिलकर यह तय करेंगे कि आगे तेजी आएगी या बड़ा क्रैश देखने को मिलेगा।
👉 निवेश करने से पहले मार्केट ट्रेंड और अपनी वित्तीय स्थिति जरूर समझें।
