Pakistan ने एक बार फिर सिंधु जल संधि को लेकर India के खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया दी है। पाकिस्तान ने साफ कहा है कि वह सिंधु जल संधि के तहत मिलने वाले अपने पानी के अधिकारों पर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा। वहीं भारत पहले ही यह स्पष्ट कर चुका है कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते।
सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान का सख्त रुख
पाकिस्तानी विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन द्वारा हाल ही में दिए गए सप्लीमेंटल अवॉर्ड से पाकिस्तान के रुख को मजबूती मिली है। यह फैसला रतले और किशनगंगा जलविद्युत परियोजनाओं में पानी भंडारण क्षमता से जुड़े विवादों पर आया है।
पाकिस्तान का दावा है कि इस फैसले ने यह साबित किया है कि सिंधु जल संधि पश्चिमी नदियों पर भारत की जल नियंत्रण क्षमता को सीमित करती है। अंद्राबी ने कहा कि भारत संधि के तहत तय नियमों से पीछे नहीं हट सकता।
कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के फैसले को बताया बाध्यकारी
पाकिस्तान ने भारत द्वारा कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के फैसले को खारिज करने की आलोचना की। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह अंतरराष्ट्रीय प्रक्रिया सिंधु जल संधि के तहत स्थापित की गई थी और इसके फैसले अंतिम एवं बाध्यकारी हैं।
अंद्राबी ने कहा कि किसी पक्ष द्वारा प्रक्रिया में भाग न लेने से कानूनी वैधता खत्म नहीं होती। पाकिस्तान का कहना है कि भारत का रवैया अंतरराष्ट्रीय समझौतों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता पर सवाल खड़े करता है।
पश्चिमी नदियों के पानी पर बढ़ा विवाद
पाकिस्तान ने न्यूनतम जल प्रवाह बनाए रखने की शर्तों पर भी जोर दिया। उसका कहना है कि पश्चिमी नदियों पर भारत की परियोजनाओं को संधि के नियमों का पूरी तरह पालन करना होगा।
पाकिस्तानी अधिकारियों ने संकेत दिया कि वे भविष्य में भी न्यूट्रल एक्सपर्ट और अंतरराष्ट्रीय मंचों का सहारा लेते रहेंगे ताकि जल अधिकारों की रक्षा की जा सके।
भारत ने क्या कहा?
भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि सीमा पार आतंकवाद जारी रहने की स्थिति में सामान्य बातचीत संभव नहीं है। भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद पिछले साल मई में सिंधु जल संधि को निलंबित करने का फैसला लिया था।
नई दिल्ली का रुख है कि आतंक और कूटनीति एक साथ नहीं चल सकते। भारत यह भी मानता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
पाकिस्तान ने भारत पर लगाए गंभीर आरोप
पाकिस्तान ने आरोप लगाया कि भारत अंतरराष्ट्रीय संधियों का पालन करने में विफल रहा है। उसने कहा कि यदि कोई देश वैश्विक मंचों पर बड़ी भूमिका चाहता है, तो उसे अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का सम्मान भी करना चाहिए।
पाकिस्तानी विदेश कार्यालय ने चेतावनी दी कि वह संधि के तहत उपलब्ध सभी कानूनी और कूटनीतिक विकल्पों का इस्तेमाल करेगा।
सिंधु जल संधि क्यों है अहम?
1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच जल बंटवारे का सबसे महत्वपूर्ण समझौता मानी जाती है।
इस संधि के तहत:
- भारत को पूर्वी नदियों का उपयोग अधिकार मिला
- पाकिस्तान को पश्चिमी नदियों का प्रमुख नियंत्रण मिला
- दोनों देशों के बीच विवाद समाधान की विशेष व्यवस्था बनाई गई
हाल के वर्षों में बढ़ते तनाव के कारण यह संधि लगातार राजनीतिक और रणनीतिक बहस का केंद्र बनी हुई है।
