Pakistan एक बार फिर आतंकवाद के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवालों के घेरे में आ गया है। गुलाम जम्मू-कश्मीर में मारे गए अल-बदर मुजाहिदीन के वरिष्ठ कमांडर और पुलवामा हमले के कथित साजिशकर्ता अर्जमंद गुलजार उर्फ हमजा बुरहान के अंतिम संस्कार में कई कुख्यात आतंकी सरगनाओं की खुली मौजूदगी ने पाकिस्तान के दोहरे रवैये को फिर उजागर कर दिया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, मुजफ्फराबाद में हुए जनाजे में हथियारबंद आतंकियों के साथ हिजबुल मुजाहिदीन के प्रमुख Syed Salahuddin समेत कई वांछित आतंकी कमांडर शामिल हुए। सुरक्षा व्यवस्था के बीच खुलेआम आधुनिक हथियारों के साथ उनकी मौजूदगी ने पाकिस्तान पर आतंकियों को संरक्षण देने के आरोपों को और मजबूत कर दिया है।
कौन था हमजा बुरहान?
अर्जमंद गुलजार उर्फ हमजा बुरहान दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले का रहने वाला था और उसे अल-बदर मुजाहिदीन का प्रमुख कमांडर माना जाता था। वह कई आतंकी गतिविधियों और हमलों में शामिल बताया जाता था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह हाल ही में मुजफ्फराबाद के पास अज्ञात हमलावरों के हमले में मारा गया था। इसके बाद शुक्रवार को उसका अंतिम संस्कार भारी सुरक्षा के बीच किया गया।
जनाजे में दिखे मोस्ट वांटेड आतंकी
हमजा बुरहान के जनाजे में कई बड़े आतंकी संगठनों के सरगना और उनके हथियारबंद साथी शामिल हुए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उनके साथ मौजूद लोगों के पास AK-47 और AK-56 जैसी आधुनिक राइफलें थीं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी सख्त सुरक्षा व्यवस्था के बीच आतंकियों का खुलेआम हथियारों के साथ मौजूद होना यह दर्शाता है कि उन्हें सरकारी संरक्षण प्राप्त है।
पाकिस्तान पर फिर उठे सवाल
Interpol और कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां लंबे समय से पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी नेटवर्क को लेकर चिंता जताती रही हैं। इसके बावजूद पाकिस्तान लगातार यह दावा करता रहा है कि वह आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है।
हालांकि इस घटना के बाद एक बार फिर पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि देश में कई आतंकी संगठन अब भी खुलेआम सक्रिय हैं और उन्हें राजनीतिक व सुरक्षा तंत्र का अप्रत्यक्ष समर्थन मिलता है।
पूर्व अधिकारियों ने क्या कहा?
जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों में अहम भूमिका निभा चुके पूर्व वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सैयद सलाहुद्दीन जैसे आतंकी लंबे समय से भारत की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल हैं। उनके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नोटिस जारी हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद वे पाकिस्तान में खुलेआम घूमते दिखाई देते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति पाकिस्तान के उस दावे को कमजोर करती है, जिसमें वह खुद को आतंकवाद का पीड़ित बताने की कोशिश करता है।
हाफिज सईद और अन्य आतंकी भी चर्चा में
Hafiz Saeed जैसे आतंकी सरगनाओं का नाम भी अक्सर पाकिस्तान में खुली गतिविधियों को लेकर सामने आता रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित होने के बावजूद उनके नेटवर्क के सक्रिय रहने को लेकर कई बार सवाल उठ चुके हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान में “कश्मीर जिहाद” के नाम पर कई संगठनों को अब भी खुली छूट मिलने के आरोप लगते रहे हैं।
आतंकवाद पर पाकिस्तान का दोहरा रवैया?
भारत लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि पाकिस्तान आतंकवाद को रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करता है। भारत का कहना है कि सीमा पार से आतंकवाद को समर्थन और प्रशिक्षण दिया जाता है।
हाल की घटना के बाद एक बार फिर यह बहस तेज हो गई है कि क्या पाकिस्तान वास्तव में आतंकवाद के खिलाफ गंभीर कार्रवाई कर रहा है या फिर अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच केवल औपचारिक बयानबाजी तक सीमित है।
वैश्विक स्तर पर बढ़ सकती है चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि आतंकियों की इस तरह सार्वजनिक मौजूदगी दक्षिण एशिया की सुरक्षा स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा सकती है। खासतौर पर तब, जब कई आतंकी संगठनों को संयुक्त राष्ट्र और विभिन्न देशों द्वारा प्रतिबंधित घोषित किया जा चुका है।
निष्कर्ष
मुजफ्फराबाद में हुए इस घटनाक्रम ने एक बार फिर पाकिस्तान और आतंकवादी संगठनों के कथित संबंधों पर चर्चा तेज कर दी है। मोस्ट वांटेड आतंकियों की सार्वजनिक मौजूदगी और हथियारबंद गतिविधियां यह संकेत देती हैं कि आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान की नीति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संदेह अब भी कायम है।
