पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब भारत में आम लोगों की जेब पर और ज्यादा पड़ सकता है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बाद अब जरूरी दवाएं भी महंगी होने की आशंका जताई जा रही है। केंद्र सरकार 384 आवश्यक और जीवन रक्षक दवाओं की कीमतों में एक बार के लिए “इमरजेंसी प्राइस हाइक” करने पर विचार कर रही है।
हालांकि राहत की बात यह है कि यह बढ़ोतरी स्थायी नहीं होगी। सरकार का कहना है कि जैसे ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में हालात सामान्य होंगे और कच्चे माल की सप्लाई सुधरेगी, दवाओं की बढ़ी हुई कीमतें वापस ली जा सकती हैं।
क्यों बढ़ सकती हैं दवाओं की कीमतें?
दवा कंपनियों का कहना है कि पश्चिम एशिया संकट के बाद कई जरूरी रसायनों और फार्मा सेक्टर में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की कीमतों में 200 से 300 प्रतिशत तक उछाल आया है। इसके अलावा पैकेजिंग मैटेरियल, ट्रांसपोर्टेशन और लॉजिस्टिक्स की लागत भी तेजी से बढ़ी है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस मुद्दे पर राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA), फार्मास्यूटिकल्स विभाग और वाणिज्य मंत्रालय के बीच लगातार चर्चा चल रही है।
कौन-कौन सी दवाएं हो सकती हैं महंगी?
रिपोर्ट्स के मुताबिक जिन दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी पर विचार किया जा रहा है, उनमें कई रोजमर्रा और जीवन रक्षक मेडिसिन शामिल हैं। इनमें:
- एंटीबायोटिक्स — एमॉक्सिसिलिन, एजिथ्रोमाइसिन
- हार्ट मेडिसिन — एम्लोडिपाइन, एटोरवास्टेटिन
- दर्द निवारक — पैरासिटामोल
- स्टेरॉयड — डेक्सामेथासोन
- विटामिन सप्लीमेंट — एस्कॉर्बिक एसिड
जैसी जरूरी दवाएं शामिल बताई जा रही हैं।
पेट्रोल-डीजल पहले ही हो चुके हैं महंगे
देश में बीते कुछ दिनों में पेट्रोल और डीजल के दाम दो बार बढ़ चुके हैं। मंगलवार को तेल कंपनियों ने ईंधन की कीमतों में करीब 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी।
नई दिल्ली में पेट्रोल का दाम बढ़कर 98.64 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया, जबकि डीजल की कीमत 91.58 रुपये प्रति लीटर हो गई। इससे पहले भी एक सप्ताह के भीतर ईंधन कीमतों में इजाफा किया गया था।
सरकार की चिंता: बढ़ता आयात बिल और विदेशी मुद्रा पर दबाव
सरकार पहले ही बढ़ती ऊर्जा कीमतों और तेल आयात पर निर्भरता को लेकर चिंता जता चुकी है। पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण भारत के विदेशी मुद्रा भंडार और चालू खाते के घाटे पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लोगों से ईंधन का सोच-समझकर इस्तेमाल करने, अनावश्यक विदेशी यात्राएं टालने और सोने की खरीद कम करने की अपील की है ताकि विदेशी मुद्रा की बचत की जा सके।
भारत के पास फिलहाल पर्याप्त तेल और गैस स्टॉक
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के अनुसार, भारत के पास फिलहाल कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त भंडार मौजूद है।
उन्होंने बताया कि देश में हर महीने करीब 1 करोड़ टन डीजल का उत्पादन होता है, जबकि खपत लगभग 85 लाख टन है।
एलपीजी सप्लाई को लेकर उन्होंने कहा कि भारत अपनी करीब 60 प्रतिशत जरूरत आयात से पूरी करता है और उसमें से लगभग 90 प्रतिशत सप्लाई स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते आती है, जो पश्चिम एशिया संकट के कारण प्रभावित हुआ है।
सरकार ने स्थिति से निपटने के लिए घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के कदम भी उठाए हैं।
