भारत में सोशल मीडिया पर इन दिनों एक नई डिजिटल लहर तेजी से चर्चा में है। इस आंदोलन का नाम है ‘Cockroach Janta Party’ यानी CJP। हैरानी की बात यह है कि इंस्टाग्राम पर इस नए प्लेटफॉर्म ने बेहद कम समय में लाखों युवाओं को अपने साथ जोड़ लिया है। सिर्फ कुछ दिनों में ही इसके फॉलोअर्स का आंकड़ा 11 मिलियन तक पहुंच गया, जो कि भाजपा के आधिकारिक इंस्टाग्राम फॉलोअर्स से भी ज्यादा बताया जा रहा है।
क्या है Cockroach Janta Party?
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ खुद को युवाओं, बेरोजगारों और इंटरनेट पर सक्रिय Gen-Z की आवाज बताती है। यह कोई पारंपरिक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक डिजिटल आंदोलन की तरह उभरा है, जिसने मीम्स, व्यंग्य और सोशल मीडिया कंटेंट के जरिए लोगों का ध्यान खींचा है।
इस प्लेटफॉर्म को शुरू करने वाले अभिजीत दिपके हैं, जो खुद को इसका “Founding President” बताते हैं। दिपके पेशे से पॉलिटिकल कम्युनिकेशन स्ट्रेटेजिस्ट हैं और फिलहाल बोस्टन यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर चुके हैं।
कैसे शुरू हुआ यह वायरल आंदोलन?
मई 2026 के दौरान सुप्रीम कोर्ट की एक सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की कथित टिप्पणियों के बाद सोशल मीडिया पर विवाद छिड़ गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ बेरोजगार और डिजिटल एक्टिविस्ट युवाओं की तुलना ‘कॉकरोच’ और ‘परजीवी’ जैसे शब्दों से की गई थी।
हालांकि बाद में स्पष्ट किया गया कि बयान को गलत तरीके से पेश किया गया था और टिप्पणी फर्जी डिग्री इस्तेमाल करने वालों के संदर्भ में थी, लेकिन तब तक इंटरनेट पर यह मुद्दा वायरल हो चुका था।
युवाओं और डिजिटल क्रिएटर्स ने इस शब्द को अपमान मानने के बजाय उसे एक प्रतीक में बदल दिया। इसी सोच से ‘Cockroach Janta Party’ का जन्म हुआ।
CJP का उद्देश्य क्या है?
16 मई 2026 को लॉन्च हुई CJP खुद को “आलसी और बेरोजगारों की आवाज” कहती है। पार्टी का स्लोगन है —
“Secular, Socialist, Democratic, Lazy.”
इस आंदोलन का मुख्य फोकस उन युवाओं पर है जो लगातार ऑनलाइन रहते हैं, सिस्टम से निराश हैं और सोशल मीडिया के जरिए अपनी आवाज उठाना चाहते हैं।
CJP का 5-पॉइंट एजेंडा
कॉकरोच जनता पार्टी ने कुछ प्रमुख मांगें भी सामने रखी हैं। इनमें शामिल हैं:
- रिटायरमेंट के बाद मुख्य न्यायाधीशों को राजनीतिक पद देने पर रोक
- सख्त दलबदल विरोधी कानून
- संसद में महिलाओं को 50% आरक्षण
- कुछ कॉर्पोरेट मीडिया संस्थानों के लाइसेंस रद्द करने की मांग
- परीक्षा घोटालों पर जवाबदेही तय करना
इसके अलावा, पार्टी ने चुनावी पारदर्शिता को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया है।
कौन हैं अभिजीत दिपके?
30 वर्षीय अभिजीत दिपके पुणे से जर्नलिज्म की पढ़ाई कर चुके हैं। इसके बाद वे उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका चले गए, जहां उन्होंने बोस्टन यूनिवर्सिटी से Public Relations में मास्टर्स किया।
वे 2020 से 2023 तक आम आदमी पार्टी (AAP) की सोशल मीडिया और डिजिटल कैंपेन टीम का हिस्सा भी रह चुके हैं। दिल्ली चुनावों के दौरान उन्होंने मीम-बेस्ड डिजिटल कैंपेनिंग पर काम किया था।
एक इंटरव्यू में दिपके ने बताया कि उन्होंने आगे की पढ़ाई और निजी जीवन पर फोकस करने के लिए AAP छोड़ी थी।
CJP में शामिल होने के लिए क्या चाहिए?
पार्टी ने अपने सदस्य बनने के लिए मजाकिया लेकिन वायरल शर्तें रखी हैं:
- बेरोजगार होना
- आलसी लेकिन विचारों से भरे रहना
- रोज कम से कम 11 घंटे ऑनलाइन रहना
- सोशल मीडिया पर तीखी लेकिन सच्ची भड़ास निकालने में माहिर होना
यही अनोखा अंदाज युवाओं को तेजी से आकर्षित कर रहा है।
BJP से आगे कैसे निकल गई CJP?
इंस्टाग्राम पर CJP की ग्रोथ ने सभी को चौंका दिया। बेहद कम पोस्ट्स के बावजूद पार्टी ने लाखों फॉलोअर्स जोड़ लिए। जहां भाजपा का सोशल मीडिया नेटवर्क लंबे समय से मजबूत रहा है, वहीं CJP ने सिर्फ कुछ दिनों में डिजिटल लोकप्रियता हासिल कर ली।
हालांकि, वास्तविक राजनीति में भाजपा अब भी देश की सबसे बड़ी और प्रभावशाली पार्टियों में शामिल है। चुनावी स्तर पर उसका संगठन और जनाधार काफी मजबूत बना हुआ है।
इंटरनेट पर इतनी लोकप्रिय क्यों हो रही है CJP?
इस आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत इसका इंटरनेट-फर्स्ट मॉडल है। टीवी डिबेट और पारंपरिक रैलियों के बजाय CJP मीम्स, व्यंग्य, वायरल पोस्ट और Gen-Z ह्यूमर के जरिए युवाओं तक पहुंच रही है।
बेरोजगारी, प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव, महंगाई और सोशल प्रेशर जैसे मुद्दों को पार्टी मजाकिया लेकिन असरदार तरीके से उठाती है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में युवा इससे जुड़ रहे हैं।
क्या यह सिर्फ मीम है या नई राजनीति की शुरुआत?
विशेषज्ञ मानते हैं कि CJP केवल एक वायरल ट्रेंड नहीं, बल्कि इंटरनेट-आधारित राजनीतिक अभिव्यक्ति का नया रूप हो सकता है। आज की Gen-Z पारंपरिक राजनीति से अलग डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अपनी नाराजगी और विचार जाहिर कर रही है।
व्यंग्य, मीम्स और ऑनलाइन कम्युनिटीज अब सिर्फ मनोरंजन नहीं रहे, बल्कि राजनीतिक चर्चा और युवाओं की आवाज का बड़ा माध्यम बनते जा रहे हैं।
