हाल के दिनों में गोल्ड मार्केट में तेज हलचल देखने को मिल रही है। अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दोनों स्तरों पर कीमतों पर दबाव के साथ निवेश मांग का असर साफ नजर आ रहा है। खासतौर पर अमेरिका के केंद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रखने के संकेतों ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है। भारत में भी सोने की बढ़ती कीमतों का असर ज्वेलरी डिमांड पर पड़ा है, जबकि निवेश के रूप में सोने की खरीदारी में बढ़ोतरी देखी जा रही है।
इंटरनेशनल मार्केट में हलचल
गुरुवार सुबह कारोबार के दौरान सोना एक महीने के निचले स्तर तक फिसल गया। हालांकि, बाद में रिकवरी देखने को मिली और COMEX गोल्ड लगभग 1.75% की बढ़त के साथ करीब 4642 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया। इसी दौरान चांदी में और तेज तेजी रही, जहां कीमतों में करीब 2.35% की उछाल दर्ज हुई।
डॉलर में कमजोरी आने पर सोना अन्य देशों के खरीदारों के लिए सस्ता हो जाता है, जिससे इसकी मांग बढ़ती है।
ब्याज दरों का असर
फेडरल रिजर्व ने फिलहाल ब्याज दरों को 3.5%–3.75% के दायरे में स्थिर रखा है, लेकिन महंगाई को लेकर चिंता बरकरार है। इसका संकेत है कि दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं। ऐसे माहौल में सोना जैसे नॉन-इंटरेस्ट एसेट्स पर दबाव बना रहता है, जिससे कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
टेक्निकल संकेत क्या कहते हैं?
हाल के हफ्तों में MCX गोल्ड अपने उच्च स्तर से नीचे आया है और बिकवाली के दबाव में बना हुआ है। चार्ट पैटर्न के अनुसार कीमतें लगातार “लोअर लो” बना रही हैं, जो आमतौर पर मंदी का संकेत माना जाता है।
अगर गोल्ड इस ट्रेंडलाइन को मजबूती से पार करता है, तो बाजार में तेजी लौट सकती है। लेकिन फिलहाल ट्रेंड कमजोर या सीमित दायरे में नजर आ रहा है।
अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल
विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले समय में ₹1,40,000 का स्तर एक मजबूत सपोर्ट हो सकता है। वहीं, ऊपर की ओर ₹1,55,500 के आसपास बड़ा रेजिस्टेंस माना जा रहा है।
जब तक इस रेंज से बाहर ब्रेकआउट नहीं मिलता, तब तक बड़ी तेजी की उम्मीद कम है और छोटी बढ़त को भी बिकवाली के मौके के रूप में देखा जा सकता है।
भारत में बदला खरीदारी का ट्रेंड
2026 की पहली तिमाही में भारत के गोल्ड मार्केट में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। बढ़ती कीमतों के चलते लोग ज्वेलरी खरीदने के बजाय निवेश के विकल्प जैसे गोल्ड बार, सिक्के और ETF की ओर ज्यादा झुक रहे हैं।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, ज्वेलरी की मांग सालाना आधार पर 19% घटकर 66.1 टन रह गई है।
कीमत बढ़ी, खर्च भी बढ़ा
हालांकि, कीमतों में तेजी के कारण कुल खर्च में गिरावट नहीं आई। पहली तिमाही में सोने पर खर्च करीब 10 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसका मतलब है कि लोग कम मात्रा में सोना खरीद रहे हैं, लेकिन ऊंचे दाम के कारण कुल वैल्यू बढ़ गई है।
ग्लोबल डिमांड का असर
वैश्विक स्तर पर सोने की तेजी में निवेश मांग का बड़ा योगदान रहा है। गोल्ड बार और सिक्कों की मांग 474 टन तक पहुंच गई, जो अब तक के सबसे ऊंचे स्तरों में से एक है।
इस दौरान चीन ने सबसे ज्यादा खरीदारी की, जहां मांग 207 टन तक पहुंच गई। इसके पीछे कमजोर शेयर बाजार, मुद्रा में गिरावट और सुरक्षित निवेश की तलाश जैसे कारण रहे।
निष्कर्ष
फिलहाल सोने की कीमतें दबाव में बनी हुई हैं, लेकिन निवेश मांग इसे सपोर्ट भी दे रही है। ऐसे में आने वाले समय में ₹1.40 लाख का स्तर बेहद अहम माना जा रहा है। अगर यह स्तर टूटता है, तो गिरावट और बढ़ सकती है, जबकि मजबूत ब्रेकआउट आने पर फिर से तेजी लौट सकती है।
