8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों के बीच उत्साह लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी बीच कर्मचारी संगठनों ने सरकार के सामने एक बड़ी मांग रखी है। कई यूनियनों, खासकर ‘ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉइज फेडरेशन’ (AINPSEF) ने मांग की है कि मौजूदा महंगाई भत्ता (DA) को बेसिक पे में शामिल किया जाए। कर्मचारियों का मानना है कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए केवल डीए बढ़ाना अब पर्याप्त नहीं है, इसलिए इसे स्थायी वेतन संरचना का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
क्या है DA मर्जर और कर्मचारियों को इससे क्या फायदा होगा?
फिलहाल सरकारी कर्मचारियों को बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता अलग-अलग मिलता है। लेकिन जब DA को बेसिक पे में मर्ज किया जाता है, तो मूल वेतन में बड़ा इजाफा हो जाता है। इसका असर केवल सैलरी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कई अन्य भत्तों और सुविधाओं पर भी पड़ता है।
DA मर्जर होने पर कर्मचारियों को ये बड़े फायदे मिल सकते हैं:
- मकान किराया भत्ता (HRA) में बढ़ोतरी
- ट्रांसपोर्ट अलाउंस ज्यादा मिलेगा
- भविष्य के इंक्रीमेंट का फायदा बढ़ेगा
- पेंशन और ग्रेच्युटी में बड़ा इजाफा होगा
- रिटायरमेंट बेनिफिट्स मजबूत होंगे
दिसंबर 2025 तक 58% पहुंच सकता है DA
कर्मचारी संगठनों द्वारा 8वें वेतन आयोग को दिए गए ज्ञापन के मुताबिक दिसंबर 2025 तक महंगाई भत्ता करीब 58 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। यूनियनों का कहना है कि यह आंकड़ा बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की बढ़ती लागत को साफ दर्शाता है।
कर्मचारियों का तर्क है कि मौजूदा समय में बच्चों की शिक्षा, मेडिकल खर्च और शहरों में ट्रांसपोर्ट जैसी जरूरतों का खर्च तेजी से बढ़ा है। ऐसे में केवल समय-समय पर मिलने वाला डीए पर्याप्त राहत नहीं दे पा रहा।
कैसे ₹18,000 से बढ़कर ₹55,000 हो सकती है न्यूनतम सैलरी?
कर्मचारी यूनियनों ने न्यूनतम वेतन तय करने के लिए एक नया फॉर्मूला पेश किया है। उनका दावा है कि अगर DA मर्जर लागू होता है, तो बेसिक सैलरी में भारी बढ़ोतरी संभव है।
1. फैमिली यूनिट मॉडल में बदलाव
अभी न्यूनतम वेतन 3 सदस्यीय परिवार के आधार पर तय किया जाता है। यूनियन अब इसे बढ़ाकर 5 सदस्यीय परिवार करने की मांग कर रही हैं। इस मॉडल के अनुसार बेस अमाउंट करीब ₹30,000 बनता है।
2. 58% DA जोड़ने का प्रस्ताव
अगर इस बेस अमाउंट में मौजूदा 58% DA को जोड़ दिया जाए, तो वेतन सीधे लगभग ₹47,400 तक पहुंच जाता है।
3. अतिरिक्त खर्चों का समावेश
इसके बाद पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य जरूरी खर्चों को जोड़कर कर्मचारी संगठन न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹55,000 से ₹60,000 के बीच तय करने की मांग कर रहे हैं।
राज्य कर्मचारियों को भी मिल सकता है फायदा
यदि केंद्र सरकार 8वें वेतन आयोग में DA मर्जर की इस मांग को स्वीकार कर लेती है, तो इसका असर केवल केंद्रीय कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा। आमतौर पर केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए वेतन ढांचे को बाद में राज्य सरकारें भी अपनाती हैं। ऐसे में देशभर के लाखों राज्य कर्मचारियों को भी इसका फायदा मिल सकता है।
सरकार का अगला कदम क्या होगा?
फिलहाल 8वां वेतन आयोग कर्मचारी संगठनों के साथ लगातार चर्चा और सलाह-मशविरा कर रहा है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि सरकार इस बड़े वित्तीय प्रभाव वाली मांग पर क्या फैसला लेती है। अगर DA मर्जर और नई वेतन संरचना को मंजूरी मिलती है, तो यह सरकारी कर्मचारियों के लिए अब तक का सबसे बड़ा वेतन सुधार साबित हो सकता है।
