देशभर में आठवें वेतन आयोग को लेकर चर्चा जोर पकड़ रही है। कर्मचारियों और पेंशनर्स की सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि इस बार महंगाई भत्ते (DA) को सीधे मूल वेतन में मर्ज किया जाएगा, ताकि उन्हें बढ़ती महंगाई के बीच तुरंत राहत मिल सके। इसी मुद्दे पर संसद में अब एक अहम अपडेट सामने आया है।
सांसद आनंद भदौरिया ने वित्त मंत्रालय से इस संबंध में पांच महत्वपूर्ण सवाल पूछे हैं, जिनके जवाब 1 दिसंबर 2025 को लोकसभा में दिए जाने हैं। इन सवालों में मुख्य रूप से महंगाई भत्ते को मूल वेतन में मर्ज करने की योजना और इसके पीछे के कारणों पर स्पष्टीकरण मांगा गया है।
सांसदों द्वारा उठाए गए पांच मुख्य सवाल:
- क्या सरकार ने हाल ही में आठवें केंद्रीय वेतन आयोग (8th CPC) के गठन की अधिसूचना जारी की है?
- अगर हां, तो इसके तहत पूरी प्रक्रिया और विवरण क्या हैं?
- क्या सरकार महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) को बेसिक पे/बेसिक पेंशन में मर्ज करने की योजना बना रही है, ताकि पिछले दशकों से बढ़ती महंगाई का बोझ कर्मचारियों और पेंशनर्स पर तुरंत कम हो सके?
- अगर ऐसा करने का निर्णय लिया गया है, तो प्रक्रिया और विस्तार से विवरण क्या होगा?
- यदि सरकार ऐसा करने की योजना नहीं बना रही है, तो इसके पीछे क्या कारण हैं?
ये सभी सवाल लोकसभा के शीतकालीन सत्र (1 दिसंबर – 19 दिसंबर 2025) के दौरान वित्त मंत्रालय के आधिकारिक जवाब के साथ उठाए जाएंगे। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 3 नवंबर 2025 को आठवें वेतन आयोग के टर्म्स ऑफ़ रेफरेंस (ToR) जारी कर दिए थे और आयोग का गठन औपचारिक रूप से हो चुका है।
क्या DA बेसिक पे में मर्ज होगा?
पिछले वेतन आयोगों के अनुभव के अनुसार, केंद्रीय कर्मचारियों के लिए DA का बेसिक पे में मर्ज करना हमेशा से एक निर्धारित प्रक्रिया रही है। उदाहरण के लिए, सातवें वेतन आयोग (7th Pay Commission) ने भी इसे अनिवार्य बताया था।
महंगाई भत्ता (DA) उस प्रतिशत को दर्शाता है, जो CPI-IW (महंगाई सूचकांक) के आधार पर तय बेस वैल्यू से ऊपर जाता है। इसका उद्देश्य कर्मचारियों और पेंशनर्स की वास्तविक आय को महंगाई से बचाना है।
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या आठवें वेतन आयोग में DA जल्दी मर्ज होगा और इससे कर्मचारियों को तत्काल राहत मिल पाएगी। इसका आधिकारिक उत्तर 1 दिसंबर 2025 को संसद में सामने आएगा।
