भारतीय रुपया इन दिनों लगातार दबाव में नजर आ रहा है। डॉलर के मुकाबले इसकी कीमत तेजी से गिर रही है और रुपया अब 97 के ऐतिहासिक निचले स्तर के बेहद करीब पहुंच चुका है।
रुपये की कमजोरी का असर सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ता है, क्योंकि इससे विदेशों से आयात होने वाली चीजें महंगी हो जाती हैं। तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य जरूरी सामान की लागत बढ़ने से महंगाई भी तेजी पकड़ सकती है।
इसी बढ़ती चिंता के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये को संभालने और विदेशी मुद्रा बाजार में स्थिरता लाने के लिए कई बड़े कदमों पर काम शुरू कर दिया है।
RBI को भारतीय अर्थव्यवस्था पर भरोसा
रिपोर्ट्स के मुताबिक, RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा और केंद्रीय बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों ने रुपये की गिरावट को लेकर कई महत्वपूर्ण बैठकें की हैं।
नीति निर्माताओं का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के मूलभूत संकेतक अभी भी मजबूत हैं और देश का बैंकिंग सिस्टम सुरक्षित स्थिति में है। हालांकि, विदेशी मुद्रा बाजार में यह मजबूती फिलहाल दिखाई नहीं दे रही है, जिसकी वजह से रुपया लगातार कमजोर हो रहा है।
अब RBI की सबसे बड़ी प्राथमिकता रुपये की गिरावट को रोकना और बाजार में भरोसा कायम रखना है।
रुपये को मजबूती देने के लिए RBI का बड़ा एक्शन प्लान
भारतीय रिजर्व बैंक के पास विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने और रुपये को सहारा देने के लिए कई रणनीतियां तैयार हैं।
1. NRI डिपॉजिट स्कीम पर फोकस
RBI अनिवासी भारतीयों (NRI) के लिए नई आकर्षक डिपॉजिट स्कीम लॉन्च कर सकता है।
ऐसा कदम 2013 के “टेपर टैंट्रम” संकट के दौरान भी उठाया गया था, जब भारत में करीब 30 अरब डॉलर का विदेशी निवेश आया था। इस बार अनुमान लगाया जा रहा है कि नई योजना के जरिए 50 अरब डॉलर तक का निवेश आकर्षित किया जा सकता है।
अगर बड़ी मात्रा में डॉलर भारत आता है, तो विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होगा और रुपये को सपोर्ट मिलेगा।
2. ब्याज दरों में बढ़ोतरी संभव
RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की अगली बैठक 3 से 5 जून के बीच होने वाली है। फिलहाल रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर स्थिर है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ाने पर विचार कर सकता है।
अगर ऐसा होता है तो भारत में निवेश पर मिलने वाला रिटर्न बढ़ेगा, जिससे विदेशी निवेशकों का रुझान भारतीय बाजार की तरफ बढ़ सकता है। इससे डॉलर का प्रवाह बढ़ेगा और रुपया मजबूत हो सकता है।
3. सॉवरेन डॉलर बॉन्ड की तैयारी
RBI और केंद्र सरकार विदेशी बाजारों से डॉलर जुटाने के लिए सॉवरेन डॉलर बॉन्ड जारी करने के विकल्प पर भी विचार कर रहे हैं।
यह अंतरराष्ट्रीय बाजार से सीधे विदेशी मुद्रा जुटाने का एक प्रभावी तरीका माना जाता है, जिससे देश के डॉलर रिजर्व को मजबूती मिल सकती है।
4. डॉलर स्वैप नीलामी का इस्तेमाल
बाजार में डॉलर की उपलब्धता बढ़ाने और बैंकिंग सिस्टम में तरलता बनाए रखने के लिए RBI ने हाल ही में 5 अरब डॉलर की स्वैप नीलामी का ऐलान किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जरूरत पड़ने पर RBI आगे भी ऐसी नीलामियां कर सकता है ताकि बाजार में स्थिरता बनी रहे और रुपये पर दबाव कम हो।
विदेशी निवेशकों की वापसी की उम्मीद
पिछले कुछ समय में अमेरिका और भारत के बीच ब्याज दरों का अंतर कम होने की वजह से विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से पैसा निकाला था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2026 में करीब 19 अरब डॉलर का विदेशी निवेश बाहर गया।
हालांकि अब उम्मीद जताई जा रही है कि RBI के संभावित कदमों के बाद भारतीय बाजार फिर से विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षक बन सकता है।
अगर भारतीय बॉन्ड और निवेश विकल्प बेहतर रिटर्न देने लगते हैं, तो विदेशी निवेशकों की वापसी तेज हो सकती है और इससे रुपये को बड़ी राहत मिल सकती है।
