आज के डिजिटल दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तेजी से लोगों की जिंदगी का हिस्सा बनता जा रहा है। अब लोग स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह लेने के लिए भी AI चैटबॉट्स और लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (LLMs) का इस्तेमाल करने लगे हैं। कई मरीज डॉक्टर के पास पहुंचने से पहले ChatGPT जैसे AI टूल्स से अपनी बीमारी, लक्षण और संभावित टेस्ट्स के बारे में जानकारी जुटा लेते हैं।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो AI मरीजों को जागरूक और सशक्त बना सकता है, लेकिन इसका गलत उपयोग मरीज और डॉक्टर के भरोसेमंद रिश्ते में दूरी भी पैदा कर सकता है।
मेडिकल सलाह के लिए बढ़ रहा AI का इस्तेमाल
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार अब बड़ी संख्या में लोग:
- बीमारी के लक्षण समझने
- मेडिकल रिपोर्ट पढ़ने
- संभावित बीमारियों के बारे में जानने
- और टेस्ट्स की जानकारी लेने
के लिए AI चैटबॉट्स का सहारा ले रहे हैं।
कई बार मरीज डॉक्टर के पास लंबी बीमारी सूची और इंटरनेट से जुटाई गई जानकारियों के साथ पहुंचते हैं। कई मरीज खुलकर यह भी बताते हैं कि उन्होंने डॉक्टर से मिलने से पहले “डॉ. ChatGPT” से सलाह ली थी।
मेडिकल रिपोर्ट समझने में मददगार हो सकता है AI
विशेषज्ञों का कहना है कि AI टूल्स मरीजों को उनकी मेडिकल रिपोर्ट समझने में मदद कर सकते हैं। अक्सर मरीज:
- मेडिकल टर्म्स नहीं समझ पाते
- रिपोर्ट पूरी पढ़ते नहीं
- या पुरानी गलत जानकारी को लेकर भ्रमित हो जाते हैं
ऐसे में AI रिपोर्ट की भाषा को आसान बनाकर जरूरी बातें समझाने में मदद कर सकता है।
लेकिन हर सलाह सही हो, जरूरी नहीं
हालांकि AI टूल्स कई मामलों में उपयोगी साबित हो सकते हैं, लेकिन उनकी सटीकता इस बात पर निर्भर करती है कि उनके पास मरीज की पूरी मेडिकल जानकारी मौजूद है या नहीं।
विशेषज्ञों का कहना है कि:
- AI बीमारी के संकेत बता सकता है
- लेकिन अंतिम इलाज तय नहीं कर सकता
- गलत जानकारी गंभीर खतरा पैदा कर सकती है
‘साइबरकोंड्रिया’ बढ़ा सकता है AI
डॉक्टरों ने AI से जुड़े एक नए खतरे की ओर भी ध्यान दिलाया है, जिसे “Cyberchondria” कहा जाता है। इसमें व्यक्ति इंटरनेट या AI पर सामान्य लक्षण खोजते-खोजते गंभीर और डरावनी बीमारियों के बारे में सोचने लगता है।
AI मॉडल कई बार उपयोगकर्ता की चिंता को समझकर उसी तरह की जानकारियां ज्यादा दिखाने लगते हैं। यह ठीक उसी तरह काम करता है जैसे सोशल मीडिया एल्गोरिद्म लगातार नकारात्मक कंटेंट दिखाते रहते हैं।
इस वजह से:
- चिंता
- तनाव
- और मानसिक दबाव
बढ़ सकता है।
AI से सवाल पूछते समय रखें सावधानी
विशेषज्ञों की सलाह है कि AI चैटबॉट का इस्तेमाल करते समय:
- सवाल स्पष्ट तरीके से पूछें
- घबराहट बढ़ने लगे तो डॉक्टर से संपर्क करें
- AI की सलाह को अंतिम सच न मानें
AI को डॉक्टर से बातचीत बेहतर बनाने के एक माध्यम की तरह इस्तेमाल करना ज्यादा सुरक्षित माना जा रहा है।
गलत सलाह से हो सकता है नुकसान
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि AI आधारित सलाह पर आंख बंद करके भरोसा करना खतरनाक हो सकता है।
एक रिपोर्ट के अनुसार, एक व्यक्ति ने साधारण नमक के विकल्प के लिए AI से सलाह ली थी। कथित तौर पर उसे सोडियम ब्रोमाइड इस्तेमाल करने की सलाह दी गई, जिससे उसकी तबीयत बिगड़ गई।
यह मामला बताता है कि AI:
- जानकारी दे सकता है
- लेकिन मेडिकल निर्णय का सुरक्षित विकल्प नहीं है।
डॉक्टर भी कर रहे हैं AI का इस्तेमाल
दिलचस्प बात यह है कि सिर्फ मरीज ही नहीं, बल्कि डॉक्टर भी अब AI टूल्स का उपयोग कर रहे हैं। एक सर्वे के मुताबिक लगभग 66% डॉक्टरों ने माना कि वे अपने मेडिकल प्रैक्टिस में AI की मदद ले रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि:
- मरीज और डॉक्टर दोनों को AI के उपयोग को लेकर पारदर्शी होना चाहिए
- तकनीक को सहयोगी की तरह इस्तेमाल करना चाहिए
- और अंतिम निर्णय विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह पर आधारित होना चाहिए।
सोशल मीडिया मैनेजमेंट में भी AI की एंट्री
AI आधारित टूल्स अब हेल्थ सेक्टर के अलावा सोशल मीडिया मैनेजमेंट में भी तेजी से इस्तेमाल हो रहे हैं। उदाहरण के तौर पर Buffer एक ऐसा AI-सपोर्टेड प्लेटफॉर्म है, जिसकी मदद से उपयोगकर्ता सोशल मीडिया पोस्ट शेड्यूल कर सकते हैं, एनालिटिक्स देख सकते हैं और अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स को आसानी से मैनेज कर सकते हैं।
AI मददगार है, लेकिन डॉक्टर का विकल्प नहीं
विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में AI हेल्थकेयर सेक्टर में बड़ी भूमिका निभाएगा। यह मरीजों को जानकारी देने, रिपोर्ट समझाने और डॉक्टर से बेहतर बातचीत करने में मदद कर सकता है।
लेकिन इलाज और मेडिकल फैसलों के लिए सिर्फ AI पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए AI को सहायक तकनीक के रूप में इस्तेमाल करना ही सबसे सुरक्षित तरीका माना जा रहा है।
