पारंपरिक खेती से धीरे-धीरे किसानों का मोह भंग होता जा रहा है। इसका एकमात्र कारण है कि पारंपरिक खेती से किसानों को खास लाभ नहीं है। यही वजह की पारंपरिक खेती के स्थान पर किसान नकदी फसलों की खेती करने लगे। नगदी फसलों में फूल की खेती किसानों के लिए बेहतर कमाई का जरिया बन रहा है। किसान कम लागत और कम समय में फूल का उत्पादन कर बेहतर कमाई कर रहे हैं।
किसान बड़े पैमाने पर पारंपरिक खेती को छोड़कर फूलों की खेती की और रुख कर रहे हैं
वैशाली जिले में भी किसान बड़े पैमाने पर पारंपरिक खेती को छोड़कर फूलों की खेती की और रुख कर रहे हैं। उन्ही किसानों में से एक है वैशाली जिला के घटारो रउदी पोखर गांव के रहने वाले मुकेश सिंह जो एक एकड़ में गेंदा फूल की खेती करके कम समय में लाखों की कमाई कर लेते हैं। मुकेश सिंह कुमार सिंह ने बताया की शादी विवाह के साथ चुनाव के सीजन में फूल की डिमांड बढ़ जाती है। खासकर चुनाव में हर पार्टी के लोग फूलों की खरीदारी करते है। लिहाजा फूल की खेती करने वाले किसानों के लिए कमाई का यह सबसे अच्छा समय होता है।
गेंदा फूल की खेती से कम समय में अच्छी कमाई हो जाती है
वैशाली में गेंदा फूल को हजार भी कहते हैं। मुकेश ने बताया की शादी के दौरान स्टेज सजाने के लिएसे लेकर पूजा पाठ में फूल की जरूरत पड़ती है। गेंदा फूल की खेती से कम समय में अच्छी कमाई हो जाती है उन्होंने बताया की गेंदा फूल की खेती में लागत भी कम आती है। कम समय कम लगत में किसानों के लिए कमाई अच्छा जरिया है इससे कोई भी किसान छोटे या बड़े स्तर पर शुरू कर सकते और अच्छी कमाई कर सकते हैं।
एक पौधे की कीमत ₹1 पड़ती है
मुकेश बताते हैं कि फूल के बीज को कोलकाता से मंगवाते हैं और एक पौधे की कीमत ₹1 पड़ती है। उन्होंने बताया कि पौधे लगाने की 2 महीने के बाद ही फूल आना शुरू हो जाता है । तैयार फूल को शादी ,विवाह ,स्टेज ,डेकोरेशन सहित अन्य काम के लिए बाजार में बेच दिया जाता है। वही किसानो ने बताया कि जिला मुख्यालय हाजीपुर सहित लालगंज जिले के अन्य इलाकों में भी फुल डिमांड के अनुसार फूलों की सप्लाई करते हैं।
अभी शादी विवाह के अलावा चुनाव का समय चल रहा है जिसके कारण प्रतिदिन फूलों की डिमांड ज्यादा है। फूल भी बाजार में बिक रहे हैं। अच्छी आमदनी भी हो रही है। उन्होंने बताया कि गेंदा फूल की खेती से तीन से चार महीने में 2 लाख से अधिक की कमाई हो जाती है।
