कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने सहारा इंडिया पर 1,204 करोड़ रुपये के PF बकाये की वसूली के लिए लखनऊ में संपत्तियों की कुर्की व नीलामी शुरू की। 2021-23 के रिकवरी सर्टिफिकेट्स पर आधारित यह कार्रवाई हजारों कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति लाभ दिलाएगी। सहारा पर SEBI-ED का पुराना दबाव बढ़ा।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने सहारा इंडिया समूह की विभिन्न इकाइयों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए 1,204 करोड़ रुपये के बकाये भविष्य निधि (PF) भुगतान की वसूली के लिए बड़ी कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। लखनऊ EPFO कार्यालय ने सोमवार को इसकी आधिकारिक घोषणा करते हुए सहारा की लखनऊ स्थित चल और अचल संपत्तियों की कुर्की व नीलामी के आदेश जारी कर दिए हैं। यह कदम सहारा पर लंबे समय से चली आ रही वित्तीय अनियमितताओं के खिलाफ सरकारी एजेंसियों की सतत कार्रवाई का हिस्सा है, जो कर्मचारियों के सेवानिवृत्ति लाभों को प्राथमिकता देता है।
रिकवरी सर्टिफिकेट्स की पृष्ठभूमि
इस कार्रवाई की पृष्ठभूमि अप्रैल 2021 से अप्रैल 2023 के बीच जारी किए गए कई रिकवरी सर्टिफिकेट्स (RC) पर आधारित है। इन सर्टिफिकेट्स को सहारा इंडिया की उन इकाइयों के खिलाफ जारी किया गया था, जो कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) अधिनियम के दायरे में आती हैं। कुल 1,204 करोड़ रुपये के इन दावों में सबसे बड़ा दावा 1,179 करोड़ रुपये का है, जो सहारा की प्रमुख इकाई से जुड़ा हुआ है।
इसके अलावा अन्य तीन प्रमुख दावे 31 लाख रुपये से लेकर 23 करोड़ रुपये के बीच के हैं। ये बकाये सहारा इंडिया फाइनेंशियल कॉर्पोरेशन लिमिटेड और सहारा इंडिया लाइफ इंश्योरेंस जैसी इकाइयों से संबंधित हैं, जहां कर्मचारियों के PF योगदानों का भुगतान वर्षों से लंबित पड़ा है।
कुर्की और नीलामी प्रक्रिया शुरू
EPFO के लखनऊ क्षेत्रीय कार्यालय ने रिकवरी अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, सहारा की लखनऊ में स्थित फैक्ट्रियां, कार्यालय भवन, जमीनें और अन्य चल संपत्तियां कुर्की के दायरे में आ रही हैं।
EPF अधिनियम की धारा 11(2) के तहत ये रिकवरी सर्टिफिकेट सरकार के टैक्स दावों के समकक्ष माने जाते हैं, जिसका अर्थ है कि कुर्की के बाद संपत्तियों की नीलामी से प्राप्त राशि का प्रथम उपयोग कर्मचारियों के बकाये PF भुगतान के लिए ही किया जाएगा। इससे सहारा समूह पर दबाव बढ़ेगा, क्योंकि पहले से ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 2025 में 1,500 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां कुर्क कर ली हैं।
सहारा पर लगातार नियामकीय दबाव
यह कार्रवाई सहारा इंडिया पर लगातार बढ़ते नियामकीय दबावों का नया अध्याय है। 2011 से सहारा ग्रुप पर SEBI, RBI और ED जैसी एजेंसियों के छापे, कुर्की और रिफंड प्रक्रियाएं चल रही हैं। 2025 में ही EPFO ने 1,180 करोड़ रुपये के बकाये पर प्रारंभिक नोटिस जारी किए थे, लेकिन अब वास्तविक वसूली प्रक्रिया तेज हो गई है। सहारा इंडिया के संस्थापक सुब्रत रॉय की मृत्यु के बाद भी समूह की वित्तीय उलझनें सुलझ नहीं पाई हैं, और हजारों कर्मचारियों व निवेशकों का पैसा फंसा हुआ है।
EPFO का यह कदम विशेष रूप से उन कर्मचारियों के लिए राहत की उम्मीद जगाता है, जिनका PF पैसा सेवानिवृत्ति, चिकित्सा या पारिवारिक जरूरतों के लिए अटका पड़ा है।
विशेषज्ञ विश्लेषण और कर्मचारी प्रतिक्रियाएं
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्रवाई कॉर्पोरेट क्षेत्र में PF अनुपालन को मजबूत करने का संदेश देती है। श्रम मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि EPFO पूरे देश में ऐसे 500 से अधिक मामलों पर नजर रखे हुए है, जहां कंपनियां PF भुगतान में चूक रही हैं। सहारा मामले में कुर्की प्रक्रिया अगले कुछ हफ्तों में तेजी पकड़ सकती है, क्योंकि अदालती आदेशों के तहत नीलामी की समयसीमा सख्त है। हालांकि, सहारा समूह की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन समूह के वकील पहले ही कोर्ट में अपील की तैयारी में हैं।
कर्मचारी संगठनों का स्वागत
कर्मचारी संगठनों ने EPFO की इस पहल का स्वागत किया है। ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) के एक नेता ने कहा, “हजारों मजदूर परिवार वर्षों से इंसाफ के लिए तरस रहे थे। यह फैसला उनके हक की जीत है।” दूसरी ओर, वित्तीय विश्लेषकों का कहना है कि सहारा की संपत्ति नीलामी से PF फंड को मजबूती मिलेगी, लेकिन समूह की जटिल कॉर्पोरेट संरचना वसूली को लंबा खींच सकती है। कुल मिलाकर, EPFO की यह कार्रवाई न केवल सहारा को सबक सिखाएगी, बल्कि अन्य डिफॉल्टर कंपनियों के लिए चेतावनी भी बनेगी।
