केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारी इस समय 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का इंतजार कर रहे हैं। इसी बीच कर्मचारी संगठनों ने सरकार के सामने एक बड़ी मांग रखी है। संगठनों का कहना है कि महंगाई भत्ता (DA) को अलग रखने के बजाय उसे सीधे बेसिक सैलरी में शामिल किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि इससे कर्मचारियों की कुल आय, भत्तों और भविष्य की पेंशन में बड़ा फायदा मिलेगा।
DA को बेसिक सैलरी में मर्ज करने का मतलब क्या है?
कर्मचारी संगठनों की मांग है कि मौजूदा महंगाई भत्ते को कर्मचारियों की मूल सैलरी यानी बेसिक पे में जोड़ दिया जाए। ऐसा होने पर कर्मचारियों का पूरा वेतन ढांचा बदल सकता है।
दरअसल, कई महत्वपूर्ण भत्ते और सुविधाएं बेसिक सैलरी के आधार पर तय होती हैं। इनमें शामिल हैं:
- हाउस रेंट अलाउंस (HRA)
- ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA)
- वार्षिक इंक्रीमेंट
- पेंशन
- ग्रेच्युटी और अन्य रिटायरमेंट बेनिफिट्स
अगर DA बेसिक पे में मर्ज हो जाता है, तो इन सभी कंपोनेंट्स की गणना भी बढ़ी हुई बेसिक सैलरी के आधार पर होगी। इससे कर्मचारियों की कुल सैलरी और रिटायरमेंट फायदे दोनों बढ़ सकते हैं।
कर्मचारी संगठन क्यों कर रहे हैं यह मांग?
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में महंगाई लगातार बढ़ी है और इसी वजह से DA का स्तर भी काफी ऊपर पहुंच चुका है।
ऑल इंडिया NPS एम्प्लॉइज फेडरेशन द्वारा 8वें वेतन आयोग को सौंपे गए ज्ञापन के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 तक महंगाई भत्ता लगभग 58% से 60% तक पहुंचने का अनुमान है।
फेडरेशन का तर्क है कि DA का इतना ऊंचा स्तर यह साबित करता है कि जीवनयापन की लागत में भारी बढ़ोतरी हुई है और कर्मचारियों की क्रय शक्ति पर असर पड़ा है। ऐसे में DA को अलग रखने के बजाय बेसिक सैलरी का हिस्सा बना देना ज्यादा व्यावहारिक होगा।
परिवार संरचना में बदलाव की भी मांग
फेडरेशन ने अपने ज्ञापन में यह भी कहा है कि 7वें वेतन आयोग के समय न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹18,000 तय की गई थी, जो पुराने तीन-सदस्यीय परिवार मॉडल पर आधारित थी।
अब कर्मचारी संगठन परिवार इकाई (Family Unit) को बढ़ाकर 5 सदस्य मानने और उसी आधार पर नई न्यूनतम सैलरी तय करने की मांग कर रहे हैं।
प्रस्तावित फॉर्मूला:
6000×5=300006000 \times 5 = 300006000×5=30000
इसके बाद कर्मचारी संगठनों ने इस राशि में मौजूदा 60% DA जोड़ने का सुझाव दिया है।
30000+(30000×0.60)=4800030000 + (30000 \times 0.60) = 4800030000+(30000×0.60)=48000
संगठनों का कहना है कि बेहतर पोषण, स्वास्थ्य और बढ़ते खर्चों को देखते हुए न्यूनतम सैलरी ₹55,000 से ₹60,000 के बीच होनी चाहिए।
कर्मचारियों को क्या हो सकता है फायदा?
अगर DA को बेसिक पे में मर्ज किया जाता है, तो इसका सीधा असर कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी, HRA, TA और भविष्य की पेंशन पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे:
- बेसिक सैलरी बढ़ेगी
- भत्तों में इजाफा होगा
- पेंशन कैलकुलेशन बेहतर होगी
- भविष्य में मिलने वाला DA भी नई बेसिक पर तय होगा
हालांकि अंतिम फैसला 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों और केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही होगा।
फिलहाल कर्मचारी संगठनों की मांगों और आयोग की बैठकों ने लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की उम्मीदें बढ़ा दी हैं।
