8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स की उम्मीदें लगातार बढ़ रही हैं। हर कोई जानना चाहता है कि नए वेतन आयोग में सैलरी कितनी बढ़ेगी, पेंशन में क्या बदलाव होंगे और क्या पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लेकर कोई राहत मिल सकती है। इसी बीच सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच हुई अहम बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
11 मई को नई दिल्ली में आयोजित नेशनल काउंसिल ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NCJCM) की बैठक में कर्मचारी यूनियनों ने वेतन, पेंशन, मेडिकल सुविधाओं, प्रमोशन और भर्ती से जुड़े कई बड़े मुद्दे सरकार के सामने रखे। बैठक की अध्यक्षता कैबिनेट सचिव T. V. Somanathan ने की।
8वें वेतन आयोग में कर्मचारियों की मांगों पर जोर
बैठक के दौरान कर्मचारी संगठनों ने स्पष्ट कहा कि 8वें वेतन आयोग में कर्मचारियों की आर्थिक और सामाजिक जरूरतों को गंभीरता से शामिल किया जाना चाहिए।
यूनियनों ने न्यूनतम वेतन, फिटमेंट फैक्टर, महंगाई भत्ता (DA), प्रमोशन नीति और भत्तों में सुधार जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। कर्मचारियों का कहना है कि बढ़ती महंगाई और जीवनयापन की लागत को देखते हुए मौजूदा वेतन ढांचा पर्याप्त नहीं रह गया है।
OPS को लेकर फिर तेज हुई मांग
बैठक में सबसे ज्यादा चर्चा पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लेकर हुई। कर्मचारी संगठनों ने मांग की कि जिन पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया 22 दिसंबर 2003 से पहले शुरू हुई थी, उन कर्मचारियों को OPS का लाभ दिया जाना चाहिए।
यूनियनों का कहना है कि नई पेंशन योजना (NPS) के मुकाबले OPS कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद ज्यादा वित्तीय सुरक्षा देती है। इसी वजह से लंबे समय से OPS बहाली की मांग उठती रही है।
मेडिकल खर्च और CGHS सुविधाओं पर उठे सवाल
कर्मचारियों ने बैठक में मेडिकल खर्च और CGHS सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं भी उठाईं। यूनियनों का कहना था कि इलाज के दौरान कई मेडिकल खर्चों की पूरी प्रतिपूर्ति नहीं मिल पाती, जिससे कर्मचारियों और पेंशनर्स पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।
बैठक में निम्न मांगें प्रमुख रहीं:
- इलाज का पूरा खर्च सरकार द्वारा वहन किया जाए
- डेंटल इम्प्लांट और हियरिंग एड जैसी सुविधाओं को बेहतर कवरेज मिले
- बच्चों की शिक्षा सहायता बढ़ाई जाए
- नए CGHS सेंटर खोले जाएं
- पेंशनर्स का मेडिकल अलाउंस बढ़ाकर ₹3,000 किया जाए
प्रमोशन में देरी पर जताई नाराजगी
कर्मचारी संगठनों ने कई विभागों में प्रमोशन प्रक्रिया में हो रही देरी पर भी चिंता जताई। यूनियनों के अनुसार कई कर्मचारियों को 3 से 5 साल तक पदोन्नति का इंतजार करना पड़ता है, जिससे उनका मनोबल प्रभावित होता है।
संगठनों ने मांग की कि प्रमोशन प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाया जाए ताकि कर्मचारियों को समय पर करियर ग्रोथ मिल सके।
आउटसोर्सिंग और खाली पदों का मुद्दा भी उठा
बैठक में आउटसोर्सिंग और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों पर बढ़ती निर्भरता का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया।
यूनियनों ने सरकार से कहा कि विभागों में बड़ी संख्या में पद खाली हैं, लेकिन नियमित भर्ती नहीं की जा रही। कर्मचारी संगठनों ने मांग रखी कि:
- खाली पदों पर स्थायी भर्ती की जाए
- अस्थायी और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को नियमित किया जाए
- विभागों में स्टाफ की कमी जल्द दूर की जाए
परिवार पेंशन और अनुकंपा नियुक्ति पर चर्चा
परिवार पेंशन के नियमों में बदलाव की मांग भी बैठक का अहम हिस्सा रही। कर्मचारी संगठनों ने सुझाव दिया कि विधवा बहू को भी परिवार पेंशन का लाभ मिलना चाहिए।
इसके अलावा अनुकंपा नियुक्ति के नियमों को आसान बनाने की मांग की गई, ताकि कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके परिवार को जल्दी राहत मिल सके।
अब कर्मचारियों की नजर आयोग की अगली सिफारिशों पर
8वें वेतन आयोग को लेकर लगातार हो रही बैठकों ने केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की उम्मीदें और बढ़ा दी हैं। माना जा रहा है कि आने वाले समय में वेतन, पेंशन, मेडिकल सुविधाओं और भत्तों को लेकर बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
अब सभी की नजर आयोग की अगली बैठकों और संभावित सिफारिशों पर टिकी हुई है।
