आईपीएल में सनराइजर्स हैदराबाद के लिए डेब्यू करते हुए साकिब हुसैन ने 4 विकेट चटका कर सभी को प्रभावित किया। हालांकि यहां तक का उनका सफर संघर्ष से भरा हुआ रहा है, आइए जानते है उनकी पूरी कहानी।
Inspiring story of Sakib Hussain: इंडियन प्रीमियर लीग के 19वें सीजन में एक नई कहानी ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा है। बिहार के 21 साल के युवा तेज गेंदबाज साकिब हुसैन ने अपने डेब्यू मुकाबले में ऐसा प्रदर्शन किया, जिसने उन्हें रातों-रात सुर्खियों में ला दिया।
सनराइजर्स हैदराबाद के लिए खेलते हुए साकिब को 13 अप्रैल को राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ आईपीएल डेब्यू का मौका मिला और उन्होंने इस अवसर को दोनों हाथों से भुनाते हुए अपनी काबिलियत का शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने इस मुकाबले में कमाल की गेंदबाजी करते हुए सभी को प्रभावित किया लेकिन उनका ये सफर संघर्ष से भरा हुआ रहा है।
डेब्यू मैच में ही Sakib Hussain ने मचाया तहलका
साकिब हुसैन (Sakib Hussain) ने अपने पहले ही आईपीएल मुकाबले में शानदार गेंदबाजी करते हुए सभी को प्रभावित किया। उन्होंने अपने चार ओवर के स्पेल में मात्र 24 रन खर्च किए और चार महत्वपूर्ण विकेट हासिल किए। उनकी धारदार गेंदबाजी के सामने विपक्षी बल्लेबाज पूरी तरह से संघर्ष करते नजर आए।
आर्मी में जाने का था सपना
साकिब हुसैन (Sakib Hussain) का सफर बेहद कठिनाइयों से भरा रहा है। बिहार के गोपालगंज जिले से आने वाले साकिब का सपना देश की सेवा करना था और वह आर्मी में भर्ती होना चाहते थे। इसके लिए वह अपने घर के पास बने आर्मी ग्राउंड में तैयारी भी करते थे, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। उनकी प्रतिभा पर कुछ लोगों की नजर पड़ी और उन्हें क्रिकेट में हाथ आजमाने की सलाह दी गई।

टेनिस बॉल से शुरू हुआ सफर
साकिब (Sakib Hussain) ने शुरुआत में टेनिस बॉल से क्रिकेट खेलना शुरू किया और धीरे-धीरे अपनी पहचान बनानी शुरू की। इस दौरान वह छोटे-मोटे मैच खेलकर कुछ पैसे भी कमाते थे।यहीं से उन्होंने यह तय कर लिया कि अब वह पूरी तरह क्रिकेट को ही अपना करियर बनाएंगे। उनकी मेहनत और लगन ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया, जहां आज वह दुनिया की सबसे बड़ी टी20 लीग में खेल रहे हैं।
जूतों के लिए मां ने बेचे जेवर
साकिब (Sakib Hussain) की कहानी का सबसे भावुक पहलू उनकी मां की कुर्बानी है। उन्होंने खुद बताया कि उनके पास स्पाइक्स वाले जूते खरीदने तक के पैसे नहीं थे, जिनकी कीमत 10 से 15 हजार रुपये होती है। बेटे के सपनों को पूरा करने के लिए उनकी मां ने अपने जेवर तक बेच दिए ताकि वह जूते खरीद सकें।
