केंद्र सरकार ने जनवरी से जून 2026 की अवधि के लिए महंगाई भत्ता (DA) बढ़ाने की घोषणा कर दी है। इस बार 7वें वेतन आयोग के तहत आने वाले कर्मचारियों के DA में 2% की बढ़ोतरी हुई है, जिससे यह 58% से बढ़कर 60% हो गया है। हालांकि, इस अपडेट में एक दिलचस्प पहलू सामने आया है—पुराने वेतन आयोग के तहत आने वाले कर्मचारियों को इससे कहीं ज्यादा प्रतिशत का लाभ मिला है।
6th और 5th Pay Commission वालों को ज्यादा फायदा क्यों?
जहां 7वें वेतन आयोग के कर्मचारियों का DA सिर्फ 2% बढ़ा है, वहीं 6वें वेतन आयोग के तहत आने वालों का DA 257% से बढ़कर 262% हो गया है, यानी 5% की बढ़ोतरी। इसी तरह, 5वें वेतन आयोग के कर्मचारियों का DA 474% से बढ़कर 483% हो गया है, जो कि 9% की वृद्धि दर्शाता है।
अलग-अलग वेतन ढांचे की वजह से फर्क
अब सवाल उठता है कि जब 7वां वेतन आयोग लागू है, तो फिर कुछ कर्मचारी अभी भी पुराने वेतन ढांचे में क्यों हैं? इसका कारण सरकारी व्यवस्था की प्रक्रिया और संस्थागत विविधता है। सभी विभाग और संस्थान एक साथ नए वेतन आयोग को लागू नहीं करते। कई स्वायत्त संस्थाएं, विश्वविद्यालय, रिसर्च संस्थान और ग्रांट-इन-एड संस्थान पुराने ढांचे पर ही काम करते रहते हैं जब तक वे आधिकारिक रूप से नए सिस्टम को अपनाते नहीं।
पेंशनर्स और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की स्थिति
कई ऐसे पेंशनर्स, जो 2006 या 2016 से पहले रिटायर हुए हैं, उनके मामलों में अभी भी विसंगतियां या कानूनी प्रक्रियाएं जारी हैं। ऐसे में उन्हें पुराने वेतन आयोग के अनुसार ही भुगतान किया जाता है। इसके अलावा, कॉन्ट्रैक्ट और अस्थायी कर्मचारियों को भी कई बार नए वेतन आयोग का पूरा लाभ नहीं मिल पाता, जिससे वे पुराने ढांचे में बने रहते हैं।
कितने लोग आते हैं 7वें वेतन आयोग के दायरे में?
अनुमान के अनुसार, 7वें वेतन आयोग के अंतर्गत लगभग 50 लाख केंद्रीय कर्मचारी और करीब 67 लाख पेंशनर्स शामिल हैं। हालांकि, एक छोटा वर्ग अभी भी पुराने वेतन ढांचे के तहत है, जिसे इस बार प्रतिशत के हिसाब से अधिक लाभ मिला है।
आगे क्या होगा? 8वें वेतन आयोग पर नजर
7वें वेतन आयोग की अवधि 2025 तक मानी जा रही थी, लेकिन इसका प्रभाव तब तक जारी रहेगा जब तक 8वां वेतन आयोग लागू नहीं हो जाता। जब नई सिफारिशें लागू होंगी, तब मौजूदा DA को बेसिक सैलरी में जोड़ दिया जाएगा और फिर DA की गणना दोबारा शून्य से शुरू होगी।
निष्कर्ष
इस बार का DA हाइक भले ही 7वें वेतन आयोग के कर्मचारियों के लिए सीमित दिखाई दे, लेकिन पूरी तस्वीर देखने पर स्पष्ट होता है कि अलग-अलग वेतन संरचनाओं के कारण कर्मचारियों को अलग-अलग स्तर पर लाभ मिला है। यही वजह है कि भारत की वेतन प्रणाली आज भी नए और पुराने ढांचों का मिश्रण बनी हुई है।
